×

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के 'अपमान' पर ओडिशा के नेताओं ने जताई नाराजगी, विरोध प्रदर्शन की चेतावनी

 

पुरी, 8 मार्च (आईएएनएस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के दार्जिलिंग दौरे के दौरान कार्यक्रम स्थल में बदलाव और प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर शुरू हुए विवाद पर ओडिशा के तमाम नेताओं की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी की निंदा की जा रही है, तो वहीं ओडिशा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने राष्ट्रपति के बयान को ही अनावश्यक बता दिया है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के बयान और राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर कहा कि हमारे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की यात्रा के दौरान सिलीगुड़ी में हुए हालिया घटनाक्रम ने ओडिशा के लोगों और भारत भर के पूरे आदिवासी समुदाय को गहरा दुख पहुंचाया है। अंतर्राष्ट्रीय संथाल कॉन्क्लेव के लिए अनुमति देने से इनकार और आयोजन स्थलों में अचानक बदलाव को केवल "सामरिक मुद्दों" के रूप में खारिज नहीं किया जा सकता। इस तरह की कार्रवाइयां गंभीर चिंताएं पैदा करती हैं और एक दुर्भाग्यपूर्ण संदेश देती हैं, जब एक कार्यक्रम, जहां राष्ट्रपति स्वयं मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं, इस तरह के व्यवधान का शिकार होता है।

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पर ओडिशा की डिप्टी सीएम पार्वती परिदा ने कहा कि एक महिला उपमुख्यमंत्री, स्वाभिमानी महिला और इस देश की नागरिक होने के नाते मैं इस घटनाक्रम पर दुख व्यक्त करती हूं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का अपमान सिर्फ एक महिला का अपमान नहीं है, बल्कि हमारे संविधान में उनके पद को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई हमारे राष्ट्रपति का अपमान करता है, तो इसका मतलब वह हमारे देश, संविधान और सभी नागरिकों का अपमान कर रहा है। एक महिला मुख्यमंत्री ने एक महिला राष्ट्रपति के साथ जो किया है, उसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। महामहिम राष्ट्रपति हमारे मान और सम्मान हैं। मैं पश्चिम बंगाल की महिलाओं और नागरिकों से कहती हूं कि वे एक ऐसी महिला को कैसे सहते हैं, जिसके पास मानवीयता नहीं है और महिलाओं के लिए संवेदनशीलता नहीं है। यह वक्त आगे आकर विरोध करने का है।

ओडिशा सरकार में मंत्री रबी नारायण नाइक ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से राष्ट्रपति के साथ किए गए बर्ताव की मैं निंदा करता हूं। ऐसा नहीं होना चाहिए। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। ये देश का बंटवारा करना चाहते हैं। राष्ट्रपति जहां जाती हैं, वहां मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल को उपस्थित होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

ओडिशा भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष ऐश्वर्या बिस्वाल ने सिलीगुड़ी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रति कथित अनादर की निंदा करते हुए इसे "बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और असंवेदनशील" बताया। उन्होंने कहा कि एक मुख्यमंत्री अभद्रता की सीमा किस कदर लांघ सकती हैं और राष्ट्रपति का अपमान कर सकती हैं, यह उन्होंने दिखा दिया। वह पश्चिम बंगाल में नियमों को तोड़ रही हैं और यह अशुभ संकेत हैं। यह हमारे गणतंत्र के लिए ठीक संदेश नहीं है।

मयूरभंज से भाजपा सांसद नबा चरण मांझी ने कहा कि राष्ट्रपति का अपमान बड़े दुख की बात है। एक महीने पहले से ही कार्यक्रम की तैयारी चल रही थी, लेकिन खास मौके से पहले ही कार्यक्रम स्थल में बदलाव कर दिया गया, जिससे वहां आने वाले लोगों को परेशानी हुई। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। उन्हें वहां उपस्थित होना चाहिए था, लेकिन वह नहीं पहुंचीं। यह नारी, गणतंत्र और आदिवासी समाज के लोगों का अपमान है। ममता बनर्जी का इतना अहंकार ठीक नहीं है।

उन्होंने कहा कि आज बहुत कष्ट है। हम चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए, क्योंकि ममता बनर्जी सीमा पार कर चुकी हैं। आदिवासी समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। जरूरत पड़ी तो हम सड़क पर उतरेंगे और उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ेगा।

क्योंझर में एससी सेल के अध्यक्ष भरत चंद्र पात्रा ने कहा कि राष्ट्रपति का पद भारत में सर्वोच्च है, लेकिन हाल ही में उनके पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान राष्ट्रपति को सम्मान नहीं मिला। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री भी उनके स्वागत में मौजूद नहीं थीं। उन्हें उपस्थित रहना चाहिए था। कार्यक्रम की जगह भी बदली गई, जो निंदनीय है। यह मुख्यमंत्री के अहंकार को दिखाता है। इसके साथ ही उनके मंत्री अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं, जो उचित नहीं है। हम इसकी निंदा करते हैं और राष्ट्रपति शासन की मांग करते हैं।

आदिवासी भुइयां सांस्कृतिक संगठन के महासचिव श्याम सुंदर नायक ने कहा कि राष्ट्रपति भारत की सर्वोच्च नागरिक हैं। ममता बनर्जी ने जो भी किया और कहा, वह उचित नहीं था। कार्यक्रम की जगह में बदलाव किया गया, यह ठीक नहीं है। उनके स्वागत के लिए जो प्रोटोकॉल है, उसे भी तोड़ा गया। मुख्यमंत्री और मंत्री नहीं पहुंचे, यह गलत है। हम इसकी निंदा करते हैं। आदिवासी समाज की तरफ से भी हम इसकी निंदा करते हैं। हम मांग करते हैं कि पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए।

आदिवासी मोर्चा के अध्यक्ष कमलाकांत सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का व्यवहार ठीक नहीं रहा। कार्यक्रम में बदलाव किया गया। वह बुरा बर्ताव करती हैं, प्रोटोकॉल नहीं मानती हैं। हम इसकी निंदा करते हैं।

आदिवासी सौंटी समाज के महासचिव राजेंद्र कुमार नायक ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति के साथ ममता बनर्जी के व्यवहार की हम कड़ी निंदा करते हैं। उनकी सरकार को बर्खास्त करके राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए।

पीसीसी अध्यक्ष भक्त चरण दास ने सिलीगुड़ी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित अपमान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा को बनाए रखा जाना चाहिए और इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। चुनाव के वक्त इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए महामहिम का जाना जरूरी था या नहीं, इस पर भी विचार किया जाना चाहिए। उन्हें हर चीज का आकलन करके जाना चाहिए था।

भक्त चरण दास ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। हालांकि, मुझे इसके बारे में जानकारी नहीं है कि आखिर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने ऐसा क्यों किया, लेकिन राष्ट्रपति ने कुछ ऐसे बयान दिए, जो आवश्यक नहीं थे।

--आईएएनएस

एएमटी/डीएससी