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पश्चिम बंगाल चुनाव: श्यामपुर में भाजपा की ऐतिहासिक जीत, अभिनेता हिरन चटर्जी ने टीएमसी का किला ढहाया

 

कोलकाता, 4 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले की चर्चित और हाई-प्रोफाइल श्यामपुर विधानसभा सीट पर इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार और टॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता हिरण्मय चट्टोपाध्याय ने शानदार जीत दर्ज करते हुए तृणमूल कांग्रेस के किले को ढहा दिया है।

चुनाव आयोग के नतीजों के अनुसार, हिरण्मय चट्टोपाध्याय को कुल 1,25,651 वोट मिले और उन्होंने टीएमसी के उम्मीदवार नादेबासी जना को 22,260 वोटों के अंतर से हराया। वहीं, कांग्रेस के उम्मीदवार एसके मंजूर आलम 1,988 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

हिरण्मय चट्टोपाध्याय, जिन्हें उनके स्क्रीन नाम 'हिरन' के नाम से जाना जाता है, बंगाली फिल्म इंडस्ट्री के एक जाने-माने अभिनेता हैं। इसके साथ ही वे अकादमिक क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। वे पीएचडी धारक हैं और आईआईटी खड़गपुर में पोस्ट-पीएचडी रिसर्च फेलो के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे खड़गपुर सदर सीट से विधायक भी रह चुके हैं। इस बार उनका ग्रामीण क्षेत्र श्यामपुर से चुनाव लड़ना इस सीट को और भी हाई-प्रोफाइल बना गया।

श्यामपुर विधानसभा सीट (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 179) का गठन 1951 में हुआ था और यह सीट लंबे समय तक राजनीतिक स्थिरता के लिए जानी जाती रही है। खासकर 2001 के बाद से यह तृणमूल कांग्रेस का अभेद्य गढ़ बन गई थी। कालीपद मंडल ने 2001 से 2021 तक लगातार पांच बार यहां से जीत दर्ज कर मजबूत पकड़ बनाई थी।

हालांकि, 2026 के चुनाव में भाजपा ने एक रणनीतिक दांव चलते हुए एक लोकप्रिय चेहरे को मैदान में उतारा, जिसका फायदा पार्टी को मिला। हिरन चटर्जी की लोकप्रियता और जमीनी स्तर पर सक्रियता ने मतदाताओं को प्रभावित किया और टीएमसी के लंबे वर्चस्व को खत्म कर दिया।

इस सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा और टीएमसी के बीच रहा। टीएमसी अपने मजबूत गढ़ को बचाने की कोशिश में थी, लेकिन जनता ने इस बार बदलाव का फैसला किया। चुनाव में ग्रामीण विकास, कृषि से जुड़े मुद्दे, सड़क और बुनियादी सुविधाएं प्रमुख चुनावी मुद्दे रहे।

श्यामपुर का सामाजिक समीकरण भी चुनावी परिणाम में अहम भूमिका निभाता है। यह एक कृषि प्रधान क्षेत्र है, जहां 'महिष्य' समुदाय का दबदबा है। इसके अलावा अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक मतदाताओं की भी बड़ी भूमिका रहती है। इन सभी वर्गों के समर्थन ने इस बार भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने में मदद की।

प्रशासनिक रूप से यह सीट 'उलुबेड़िया' लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है, जो राज्य की एक महत्वपूर्ण संसदीय सीट मानी जाती है।

इतिहास के नजरिए से देखें तो इस सीट पर समय-समय पर अलग-अलग दलों का प्रभाव रहा है। शुरुआती दौर में फॉरवर्ड ब्लॉक और कांग्रेस का दबदबा था, लेकिन 2001 के बाद से यह पूरी तरह टीएमसी के नियंत्रण में रही। 2026 में पहली बार भाजपा ने इस सीट पर जीत दर्ज कर नया इतिहास रच दिया है।

हिरन चटर्जी की यह जीत भाजपा के लिए भी एक बड़ी रणनीतिक सफलता के तौर पर देखी जा रही है।

--आईएएनएस

वीकेयू/