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पश्चिम बंगाल भाजपा ने सीईओ को लिखा पत्र, कोलकाता पुलिस के तीन अधिकारियों को हटाने की मांग

 

कोलकाता, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों के बीच चुनावी निष्पक्षता को लेकर विवाद तेज हो गया है। इसी क्रम में विपक्षी भाजपा के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को एक पत्र लिखा।

सुवेंद्रु अधिकारी ने पत्र में उन्होंने कोलकाता पुलिस के उपायुक्त (डीसीपी) शांतनु सिन्हा बिस्वास, इंस्पेक्टर बिजितास्वा राउत (आईसी) और सब-इंस्पेक्टर राहुल अमीन अली शाह (एसआई) को पक्षपाती बताते हुए तत्काल पद से हटाने और राज्य से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की है।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद भी इन अधिकारियों ने पश्चिम बंगाल पुलिस कल्याण समिति के राज्य सम्मेलन में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपना 'संरक्षक' बताते हुए टीएमसी की जीत सुनिश्चित करने की अपील की। एक वीडियो संलग्न कर इस दावे को समर्थन दिया गया है। सुवेंद्रु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि ये अधिकारी पुलिस बल को टीएमसी के पक्ष में प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं, जो चुनावी प्रक्रिया की शुचिता के विरुद्ध है।

इससे पहले 9 मार्च 2026 को ईसीआई की पूर्ण पीठ के समक्ष और 22 मार्च 2026 को अलग पत्र के माध्यम से शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 2021 के चुनावों में भी इनका तबादला मतदान पूरा होने के बाद ही किया गया था, जिससे संदेह व्यक्त किया गया। पत्र में इन अधिकारियों की पदोन्नति, सेवा विस्तार और कालीघाट पुलिस स्टेशन से जुड़े कामों का भी जिक्र है।

शांतनु सिन्हा बिस्वास की सेवानिवृत्ति 31 अगस्त 2025 को होनी थी, लेकिन इसे दो वर्ष बढ़ा दिया गया। ईसीआई ने उन्हें 2021 में आर्थिक अपराध निदेशालय में ट्रांसफर किया था, फिर भी वे कालीघाट से काम करते रहे। सुवेंद्रु अधिकारी ने ईसीआई से अनुरोध किया है कि इन अधिकारियों को पश्चिम बंगाल से बाहर स्थानांतरित कर चुनाव समाप्ति तक राज्य से दूर रखा जाए, ताकि कानून-व्यवस्था और मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे।

चुनाव-पूर्व सुझावपत्र के साथ चुनावी सुधारों के कुल 18 सुझाव भी संलग्न किए गए हैं, जैसे, मतदान की प्रक्रिया को वर्तमान में प्रस्तावित 7-8 लंबे चरणों के बजाय कम समय में केवल एक या अधिकतम दो चरणों में पूरा किया जाए, और पिछले तीन चुनावों, अर्थात् 2019 लोकसभा, 2021 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनावों में भारत निर्वाचन आयोग के आदेश पर जिन अधिकारियों का तबादला किया गया था, उनका पुनः स्थानांतरण किया जाए।

अन्य सुझावों में उन सभी संवेदनशील बूथों की पहचान की जाए जहां पिछले तीन चुनावों के दौरान मतदान के समय या उसके बाद हिंसा हुई थी और जहां 85 प्रतिशत या उससे अधिक मतदान दर्ज किया गया था। राज्य पुलिस पर अत्यधिक निर्भरता कम करते हुए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की पर्याप्त संख्या में और काफी पहले से तैनाती की जाए, ताकि वे स्थानीय क्षेत्र से परिचित हो सकें।

इनके अलावा सीएपीएफ के नोडल अधिकारी को सख्त निर्देश दिए जाएं कि वे बल की आवाजाही सुनिश्चित करें और यह भी सुनिश्चित करें कि सीएपीएफ कर्मी स्थानीय लोगों से किसी भी प्रकार की मेहमाननवाजी स्वीकार न करें, जैसा कि पिछले चुनावों में देखा गया था। सामान्य पर्यवेक्षकों और पुलिस पर्यवेक्षकों को चुनाव से काफी पहले तैनात किया जाए, जिससे वे अपने क्षेत्र को अच्छी तरह जान सकें और स्वतंत्र मूल्यांकन कर सकें।

साथ ही बड़े बहुमंजिला आवासीय परिसरों में मतदान केंद्र अनिवार्य रूप से उसी भवन के अंदर स्थापित किए जाएं, जैसा कि निर्वाचन आयोग के मानदंडों में प्रावधान है। साथ ही, पश्चिम बंगाल पुलिस कल्याण संगठन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जाए और इसके सभी कार्यालयों तथा परिचालन क्षेत्रों को सील कर दिया जाए।

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च 2026 को पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित किया। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में, 23 अप्रैल को 152 सीटों पर और 29 अप्रैल को 142 सीटों पर, मतदान होगा। मतगणना 4 मई को होगी।

--आईएएनएस

एससीएच