पर्वतारोही अनीता कुंडू: हालातों को बनाया हथियार, दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर लहराया तिरंगा
नई दिल्ली, 7 जुलाई (आईएएनएस)। कुछ लोग बस किस्मत का इंतजार करते हैं लेकिन कुछ लोग अपनी मेहनत और हौसले से अपनी किस्मत खुद लिखते हैं। हरियाणा की बेटी अनीता कुंडू ऐसी ही शख्सियत हैं, जिन्होंने मुश्किल हालातों को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि अपनी ताकत बना लिया। कभी परिवार की जिम्मेदारियां उठाने के लिए दूध बेचने वाली अनीता ने अपने हौसले के दम पर दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा लहराकर देश का नाम रोशन किया।
8 जुलाई 1991 को हरियाणा के हिसार जिले के एक छोटे से गांव में जन्मी अनीता कुंडू का बचपन आसान नहीं था। महज 12 साल की उम्र में उनके सिर से पिता का साया उठ गया। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई। ऐसे समय में उनकी मां ने खेतों में मेहनत कर परिवार को संभाला और अनीता ने भी घर की जिम्मेदारियों में मां का साथ दिया। वह दूध बेचकर परिवार की मदद करती थीं।
अनीता बचपन से ही मजबूत इरादों वाली थीं। उन्हें खेलों में खास रुचि थी और उन्होंने पांचवीं कक्षा से कबड्डी खेलना शुरू किया था। लेकिन पिता के निधन के बाद परिवार की परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उन्हें अपना यह शौक छोड़ना पड़ा। चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी होने के कारण अनीता ने कम उम्र में ही जिम्मेदारियों को समझ लिया।
अनीता ने अपनी पढ़ाई हिसार से पूरी की। उन्होंने जाट कॉलेज से बीए किया और इसके बाद इतिहास विषय में एमए की पढ़ाई पूरी की। साल 2008 में उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया जब उनका चयन हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल के पद पर हुआ। सरकारी नौकरी मिलने से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी लेकिन अनीता के अंदर कुछ बड़ा करने की इच्छा लगातार बढ़ती रही।
हरियाणा पुलिस में प्रशिक्षण के दौरान अनीता की रुचि पर्वतारोहण की ओर बढ़ी। ऊंचे पहाड़ों को देखकर उनके मन में उन्हें फतह करने का सपना जागा। उन्होंने अपने अधिकारियों से इस इच्छा के बारे में बात की और उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिला।
इसके बाद अनीता कुंडू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर भारत का तिरंगा लहराया। वह चीन और नेपाल दोनों मार्गों से माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय महिला पर्वतारोही बनीं। इसके अलावा उन्होंने दुनिया की कई अन्य ऊंची चोटियों पर भी सफलता हासिल की।
अनीता ने माउंट मकालू और माउंट मनास्लू जैसी कठिन चोटियों को भी अपने साहस से जीता। उन्होंने अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी विन्सन मैसिफ और दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी अकोंकागोआ पर भी चढ़ाई की।
उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार और कल्पना चावला अवॉर्ड जैसे सम्मान भी मिल चुके हैं।
--आईएएनएस
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