परिसीमन और विपक्षी एकजुटता पर जेडीयू का हमला, कांग्रेस की भूमिका पर उठाए सवाल
पटना, 18 जुलाई (आईएएनएस)। जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कांग्रेस के अंदरूनी विवाद, विपक्षी गठबंधन की स्थिति और केंद्र सरकार के कामकाज को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस संगठनात्मक रूप से लगातार कमजोर हो रही है और उसके भीतर नेतृत्व को लेकर गहरे मतभेद हैं, जिसका असर आगामी विधानसभा चुनावों में देखने को मिलेगा।
जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि जब भी राहुल गांधी किसी मुद्दे में हस्तक्षेप करते हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और अनुसूचित जाति सहित कमजोर वर्गों के बीच उनकी अच्छी पकड़ है। इसके बावजूद मौजूदा नेतृत्व के साथ उनके मतभेद इतने गहरे हैं कि वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल भी उन्हें दूर नहीं कर सके।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अब अनुशासन लागू करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पार्टी के भीतर बने हालात कांग्रेस के लिए चुनावी नुकसान का कारण बन सकते हैं। कभी देश की सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत रही कांग्रेस अब धीरे-धीरे संगठन के रूप में अपनी अहमियत खो रही है। लोकतंत्र और शासन के मुद्दे पर बोलते हुए राजीव रंजन ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ताधारी दल से सवाल पूछना हर नागरिक और विपक्ष का अधिकार है, लेकिन अंतिम फैसला जनता ही करती है।
उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगियों के लंबे शासन की तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले केंद्र सरकार के कार्यकाल से करते हुए कहा कि कांग्रेस का शासन भ्रष्टाचार और घोटालों से प्रभावित रहा, जिसके कारण जनता का भरोसा उससे लगातार कम होता गया।
वहीं उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल को बेहतर बताते हुए कहा कि इसी वजह से जनता लगातार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पक्ष में जनादेश देती रही है।
विपक्षी दलों के बीच तालमेल और परिसीमन विधेयक के मुद्दे पर भी जेडीयू प्रवक्ता ने कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ती है, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ उसके मतभेद हैं, पंजाब में उसका सीधा मुकाबला आम आदमी पार्टी से है और केरल में वह वाम दलों के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष करती है। ऐसे में कांग्रेस अपने सहयोगी दलों का विश्वास खो चुकी है।
राजीव रंजन ने दावा किया कि क्षेत्रीय दल अब कांग्रेस की बात सुनने को तैयार नहीं हैं, इसलिए परिसीमन विधेयक जैसे मुद्दों पर सहयोगियों को एकजुट करने की उसकी कोशिशें सफल नहीं होंगी।
--आईएएनएस
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