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परीक्षा घोटाले के पूरे नेटवर्क की जांच जरूरी, गिरफ्तारी से मामला खत्म नहीं होगा: बाबूलाल मरांडी

 

नई दिल्ली, 18 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासत तेज हो गई है। झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कुछ लोगों की गिरफ्तारी जरूर हुई है, लेकिन केवल गिरफ्तारी से पूरा मामला सामने नहीं आएगा। कथित गड़बड़ी के पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क और उन लोगों की पहचान जरूरी है, जिनके संरक्षण में यह व्यवस्था चल रही थी।

बाबूलाल मरांडी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि गिरफ्तारियां तो काफी समय से शुरू हो चुकी हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि इस पूरे मामले के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वे इस पूरे तंत्र में केवल 'इंस्ट्रूमेंट' की तरह काम कर रहे हो सकते हैं। इन लोगों की गिरफ्तारी अच्छी बात है, लेकिन इससे यह मान लेना सही नहीं होगा कि मामला यहीं खत्म हो गया। पिछले तीन-चार वर्षों के दौरान झारखंड में हुई कई परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। मरांडी ने सहायक आचार्यों की नियुक्ति, माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों की नियुक्ति, महिला पर्यवेक्षिका और जेएसएससी से जुड़ी विभिन्न परीक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कथित तौर पर किसी भी परीक्षा को नहीं छोड़ा गया।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अलग-अलग प्रतिनिधिमंडलों और अभ्यर्थियों के उनके पास पहुंचने के बाद उन्हें कई परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायतें मिली हैं। अभ्यर्थियों से बातचीत के दौरान यह सामने आया कि अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। मरांडी ने आरोप लगाया कि यदि कई वर्षों में लगातार अलग-अलग परीक्षाओं में एक जैसी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं तो यह किसी एक व्यक्ति की गलती नहीं हो सकती। उन्होंने इसे एक संगठित गिरोह का मामला बताते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर कथित अनियमितताएं बिना किसी बड़े संरक्षण के लंबे समय तक चलना संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल निचले स्तर पर काम करने वाले लोगों को पकड़ने से जांच पूरी नहीं होगी। यह पता लगाना जरूरी है कि परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया में कथित तौर पर पैसे का खेल किस स्तर तक पहुंचा और इसके पीछे कौन लोग थे। जेपीएससी के चेयरमैन की गिरफ्तारी हो चुकी है और उनके परिसरों पर छापेमारी भी हुई है। उनके मुताबिक, जांच एजेंसियों की कार्रवाई से मामले के कुछ पहलू सामने आए हैं।

उन्होंने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग, यानी जेएसएससी, के स्तर पर भी जांच आगे बढ़ाने की मांग की। मरांडी ने कहा कि जेएसएससी के चेयरपर्सन के पद पर प्रशांत कुमार, आईएएस, 2024 से प्रभार में हैं और अभी तक जांच उस स्तर तक पहुंचती दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे यह सवाल उठता है कि क्या ऊंचे पदों पर बैठे लोगों या कथित 'सफेदपोश' चेहरों को बचाने की कोशिश हो रही है। यदि जांच सिर्फ उन लोगों तक सीमित रहती है, जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा में गड़बड़ी को अंजाम दिया, तो पूरे नेटवर्क का खुलासा नहीं हो पाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि किसी ने पैसे के बल पर नौकरी हासिल की है और वह जांच में दोषी पाया जाता है तो उसकी नौकरी जाना स्वाभाविक है। लेकिन, बड़ा सवाल उन लोगों का है जिन्होंने कथित तौर पर पैसे लेकर नौकरी बेचने का काम किया और जिनके संरक्षण या सहयोग से पूरा तंत्र चल रहा था। अभ्यर्थियों की मांग केवल गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है। छात्र और अभ्यर्थी चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच हो तथा यह पता लगाया जाए कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार की जड़ें कहां तक फैली हुई हैं।

सीबीआई जांच की मांग का समर्थन करते हुए मरांडी ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच होने पर पूरे नेटवर्क, कथित आर्थिक लेनदेन, परीक्षा प्रक्रिया में शामिल लोगों और ऊंचे स्तर पर संभावित संरक्षण की भी पड़ताल हो सकती है। झारखंड के युवाओं का भरोसा भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता पर टिका है। अगर बार-बार परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप लगते हैं तो इससे लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ता है। ऐसे में केवल कुछ लोगों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे मामले की तह तक जाकर जिम्मेदार लोगों की पहचान और कार्रवाई जरूरी है।

--आईएएनएस

पीएसके/डीकेपी