परंपरा से प्रगति तक: मूंज शिल्प ने बदली रजनी बाला की दुनिया
लखनऊ, 2 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में सामाजिक परिवर्तन और नई संभावनाओं के क्रम में महिलाएं अपने संकल्प और परिश्रम से आत्मनिर्भर विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। सुल्तानपुर के कुड़वार ब्लॉक के गांव हरखपुर की रहने वाली रजनी बाला इसका सशक्त उदाहरण हैं, जिन्होंने मूंज उत्पादों में सिकहुला, भउका, दौरी, डोलची और कप जैसी कलाकृतियों को बढ़ावा देकर अपनी अलग पहचान बनाई है।
रजनी बाला ने 12वीं तक शिक्षा प्राप्त की है। वह बताती हैं कि मूंज शिल्प का हुनर उन्हें अपनी मां से विरासत में मिला। उनकी मां भी मूंज के उत्पाद तैयार करती थीं, जिससे बचपन से ही रजनी को इस कार्य का पारिवारिक वातावरण और व्यावहारिक अनुभव मिलता रहा। उसी सीख और लगन के दम पर आज रजनी विभिन्न प्रकार के मूंज उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर बनी हैं।
उनके पति दिल्ली में एक निजी कंपनी में कैब चलाते हैं और रजनी के काम में पूरा सहयोग देते हैं। उनके दो बच्चे हैं, बेटा लखनऊ में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी सुल्तानपुर के एक विद्यालय में अध्ययनरत है। मूंज के प्रत्येक उत्पाद की कीमत अलग-अलग होती है, लेकिन लाभ की दृष्टि से यह व्यवसाय काफी मजबूत है।
रजनी बाला बताती हैं कि औसतन हर उत्पाद पर लगभग 50 प्रतिशत तक शुद्ध लाभ हो जाता है। यदि किसी उत्पाद को तैयार करने में 100 रुपए की लागत आती है, तो उसका बाजार मूल्य लगभग 150 रुपए होता है। उनके व्यवसाय को अब अन्य राज्यों से भी पहचान मिल रही है। अब तक का उनका सबसे बड़ा और लाभदायक ऑर्डर राजस्थान से मिला, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने करीब 100 महिलाओं को रोजगार का अवसर दिया।
इस तरह रजनी बाला न केवल स्वयं सशक्त बन रही हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी आजीविका से जोड़कर सामूहिक आत्मनिर्भरता की मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं।
रजनी बाला ने बताया कि उनके मूंज उत्पादों के निर्माण और विपणन में जिला उद्योग कार्यालय का महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है। विशेष रूप से जिला उपायुक्त नेहा सिंह के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से उन्हें अपने उत्पादों को बड़े मंच तक ले जाने का अवसर मिला। इसी सहयोग के चलते उन्होंने नोएडा, सुल्तानपुर के साथ-साथ लखनऊ और आसपास के अन्य जिलों में भी स्टॉल लगाकर अपने उत्पादों की सफलतापूर्वक बिक्री की है। सरकारी समर्थन और अपने परिश्रम के बल पर रजनी बाला आज स्थानीय शिल्प को व्यापक बाजार से जोड़ते हुए आत्मनिर्भरता की सशक्त मिसाल बनी हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाएं प्रदेशभर में महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर रही हैं। राज्य स्तर पर अब तक लाखों महिलाओं एवं युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। इन योजनाओं के प्रभाव से सुल्तानपुर सहित कई जिलों में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। जो युवा कभी बेरोजगारी से जूझ रहे थे, वे आज आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार कर रहे हैं।
यूपी सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक महिलाएं और युवा इन योजनाओं का लाभ उठाकर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने में भागीदारी निभाएं। विभिन्न विभाग अपने स्तर पर आवेदकों को मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान कर रहे हैं, ताकि प्रक्रिया सरल और सुलभ बनी रहे। साथ ही, समय-समय पर जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इन सफल युवाओं और महिलाओं की प्रेरक कहानियां न केवल अन्य लोगों के लिए उत्साह का स्रोत बन रही हैं, बल्कि सुल्तानपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में विकास और आत्मनिर्भरता की नई रोशनी भी फैला रही हैं।
--आईएएनएस
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