×

पाकिस्तान में बैठक अनिश्चित, ट्रंप की शर्तें न मानी तो टैंक-पावर प्लांट उड़ाने की चेतावनी: विजय कलंत्री

 

मुंबई, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। विश्व व्यापार केंद्र (डब्ल्यूटीसी) मुंबई के चेयरमैन और ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज (एआईएआई) के अध्यक्ष डॉ. विजय कलंत्री ने पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) संकट पर चिंता जताते हुए कहा कि पाकिस्तान में हो रही बैठक का भविष्य अनिश्चित है।

उन्होंने आईएएनएस से विशेष बातचीत में कहा, "पाकिस्तान में एक बैठक होनी है। अभी तक ईरान की तरफ से कोई स्पष्ट संदेश नहीं आया है कि वह शामिल होगा या नहीं। कुछ लोग कह रहे हैं कि बैठक होगी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो हालिया बयान दिया है, उसके अनुसार अगर शर्तें नहीं मानी गईं तो वे टैंक और पावर प्लांट उड़ा देंगे। ऐसे में लगता है कि बैठक होने की संभावना कम है।"

कलंत्री ने भारतीय जहाजों पर हाल के हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि जब घटना हुई, तब भारतीय जहाज क्षेत्र में आ रहे थे। खुशकिस्मती से गैस और तेल से संबंधित भारतीय जहाजों को दूसरे देशों जितनी परेशानी नहीं हुई। उन्होंने कहा, "हमले में 'गलत पहचान' का मामला प्रतीत होता है। यह जानबूझकर नहीं किया गया था।"

डॉ. विजय कलंत्री ने यूएई और सऊदी अरब के रुख का हवाला देते हुए बताया कि वे युद्ध जारी रखने के पक्ष में हैं क्योंकि उन्हें खतरा महसूस हो रहा है। इजरायल भी लेबनान को लेकर युद्धविराम का विरोध कर रहा है। हालांकि, ट्रंप ने युद्धविराम की बात कही है। कलंत्री ने कहा, "अगर ट्रंप सचमुच चाहते हैं और अमेरिका की तरफ से इजरायल को समर्थन नहीं मिलता, तो युद्धविराम हो सकता है। इजरायल इस पूरे मामले में बहुत अहम भूमिका निभा रहा है और आगे भी निभाएगा।"

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की भारत यात्रा के संदर्भ में कलंत्री ने दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "वर्तमान में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच व्यापार लगभग 25-27 अरब डॉलर का है। हमारा मानना है कि 2030 तक यह बढ़कर 50 अरब डॉलर हो जाएगा। यह लक्ष्य पूरी तरह संभव है। स्टील उद्योग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी, शिपबिल्डिंग, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं। कोरिया की यह यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है और इससे आपसी व्यापार में बड़ी बढ़ोतरी होगी।"

डॉ. विजय कलंत्री ने भारत के रक्षा निर्यात पर संतोष जताते हुए कहा कि इस वित्तीय वर्ष में रक्षा क्षेत्र में 62 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया, "हमने इस साल 38,000 करोड़ रुपए (लगभग 38,424 करोड़) का रक्षा निर्यात किया है। मुझे विश्वास है कि अगले पांच वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन में जो विजन है, वह जरूर पूरा होगा। भारत अब वैश्विक स्तर पर रक्षा उपकरणों का एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता बनता जा रहा है।"

कलंत्री ने जोर देकर कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियाद पर खड़ी है। पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करते हुए भी भारत व्यापार और निवेश के नए अवसर तलाश रहा है। दक्षिण कोरिया के साथ साझेदारी और रक्षा निर्यात में हुई प्रगति इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी