पाकिस्तान कर्ज के बोझ और कमजोर आर्थिक परिदृश्य का सामना कर रहा
वॉशिंगटन, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान बढ़ते कर्ज़ के दबाव, कमजोर विकास संभावनाओं और लगातार बनी रहने वाली संरचनात्मक कमजोरियों का सामना कर रहा है। विश्व बैंक के मुताबिक पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता को खतरा है।
रिपोर्ट में बताया गया कि जिन अर्थव्यवस्थाओं पर सार्वजनिक कर्ज़ अधिक है, जिनके पास सीमित राजकोषीय गुंजाइश है और जिनकी बाहरी वित्तपोषण आवश्यकताएं भारी हैं, वे बढ़ती ऊर्जा कीमतों और कड़े वित्तीय हालात जैसे वैश्विक झटकों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बनी रहती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान जिसे अब दक्षिण एशिया के बजाय एक व्यापक क्षेत्रीय समूह के तहत आंका जा रहा है, इसी तरह की कमजोर अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में आता है।
उच्च बाहरी वित्तपोषण आवश्यकताएं एक प्रमुख चिंता हैं। विश्व बैंक के अनुसार, जिन देशों पर अधिक कर्ज़ है और जिनके विदेशी मुद्रा भंडार सीमित हैं, वे मुद्रा अवमूल्यन, बढ़ती उधारी लागत और घटते निवेशक विश्वास के दबाव का सामना करते हैं।
राजकोषीय कमजोरी नीतिगत विकल्पों को सीमित करती रहती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कम कर राजस्व और लगातार बने रहने वाले घाटे, आर्थिक झटकों का सामना करने या विकास को समर्थन देने की क्षमता को बाधित करते हैं।
ऊर्जा पर निर्भरता भी दबाव बढ़ाती है। आयातित ईंधन पर निर्भर अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक कीमतों में उछाल के प्रति संवेदनशील होती हैं, जिससे चालू खाता घाटा बढ़ता है और महंगाई में इजाफा होता है।
रिपोर्ट ने चेतावनी दी कि वैश्विक वित्तीय अस्थिरता इन दबावों को और बढ़ा सकती है। पूंजी का बहिर्वाह, कम तरलता और ऊंची ब्याज दरें कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक गतिविधियों को और धीमा कर सकती हैं।
बैंकिंग क्षेत्र के जोखिम भी बने हुए हैं। गैर-निष्पादित ऋणों (एनपीए) का उच्च स्तर और कमजोर वित्तीय बफर, ऋण वृद्धि और निवेश को सीमित कर सकते हैं, जिससे सुधार में देरी होती है।
विश्व बैंक ने जोर देकर कहा कि दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधार बेहद महत्वपूर्ण हैं। राजकोषीय प्रबंधन को मजबूत करना, सुशासन में सुधार करना और कारोबारी माहौल को बेहतर बनाना स्थिरता बहाल करने और निवेश आकर्षित करने के लिए जरूरी है।
व्यापार और प्रौद्योगिकी में वैश्विक बदलाव भी अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं। मांग में कमी और निर्यात क्षेत्रों में व्यवधान, पहले से दबाव झेल रही अर्थव्यवस्थाओं के लिए विकास के अवसरों को सीमित कर सकते हैं।
हाल के वर्षों में पाकिस्तान को बार-बार भुगतान संतुलन संकट का सामना करना पड़ा है, जिसके चलते अक्सर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से सहायता लेनी पड़ी है। उच्च महंगाई, मुद्रा अस्थिरता और ऊर्जा की कमी ने विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।
अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के प्रयास राजकोषीय सुदृढ़ीकरण और संरचनात्मक सुधारों पर केंद्रित रहे हैं, लेकिन प्रगति असमान रही है, जिससे देश बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है।
--आईएएनएस
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