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पद्मश्री सम्मान से गदगद एसिड अटैक सर्वाइवर मंगला कपूर बोलीं-पीएम के शब्दों ने हौसला दिया

 

वाराणसी, 25 जनवरी (आईएएनएस)। गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले रविवार को पद्मश्री पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है, जिसमें देश के अलग-अलग राज्यों के नायकों को उनके साहस और अच्छे कार्यों के लिए सम्मानित किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश से इस बार कई नायकों को पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा, जिसमें काशी हिंदू व‍िश्‍वव‍िद्यालय की सेवान‍िवृत्‍त प्रोफेसर मंगला कपूर का नाम शामिल है, जो पहले से कई पुरस्कारों से नवाजी जा चुकी हैं।

प्रेरणादायक संगीतकार और एसिड अटैक सर्वाइवर के तौर पर देशभर में पहचान बनाने वाली मंगला कपूर पद्मश्री पुरस्कार मिलने से काफी खुश हैं। उन्होंने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा, "जब सुबह फोन आया तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ। मैंने कई साल तक संघर्ष किया है और मेरे भाई ने मेरा साथ दिया है। आज लग रहा है कि सारी मेहनत और सारा संघर्ष पूरा हो चुका है। इस समाज ने मुझे कभी नहीं पूछा, लेकिन इन पुरस्कारों ने मुझे समाज में खड़े होने की हिम्मत दी है।

अपनी आपबीती बताते हुए मंगला कपूर ने कहा, "12 साल की उम्र में मुझ पर एसिड अटैक हुआ था। 6 साल तक लगातार अस्पताल में रही और शरीर पर 36 सर्जरी हुई। उसके बाद शुरू हुआ असली संघर्ष। इस चेहरे के साथ समाज अपनाने के लिए तैयार नहीं था।" उन्होंने आगे बताया कि बचपन से संगीत में रुचि थी और आवाज भी अच्छी थी। "मैंने संगीत में शिक्षा ली और संगीत में ही आगे की पढ़ाई की। कई साल काशी हिंदू व‍िश्‍वव‍िद्यालय में टीचर के पद पर काम किया, लेकिन मैंने अपनी जिंदगी पर 'सीरत' नाम की किताब लिखी थी."

उन्होंने आगे कहा, 'सीरत' के विमोचन के बाद जब लोगों ने उसे पढ़ा तो मेरी जिंदगी बदल गई। लोग खुद मेरे पास आने लगे, मुझे जानने लगे और मैंने कई जगह पर लेक्चर भी दिया। जो समाज मुझे अपना नहीं पा रहा था, उसी ने मुझे इस किताब के जरिए नई पहचान दी।

पीएम मोदी की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी द्वारा विकलांग को 'दिव्यांग' शब्द देने से मैं बहुत ज्यादा प्रभावित हूं, क्योंकि विकलांगता का दर्द मैंने सहा है और मुझे पता है कि कितना कष्ट झेलना पड़ता है। समाज के लोग विकलांगों को कई अपमानजनक नामों से बुलाते हैं, लेकिन उनके द्वारा दिए गए 'दिव्यांग' शब्द ने सबको हौसला दिया है।

--आईएएनएस

पीएस/वीसी