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SIR पर ओवैसी का बड़ा आरोप, बोले- यह बैकडोर NRC; मुंबई में आज CJP का प्रदर्शन

 

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में SIR को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। ओवैसी ने आरोप लगाया कि SIR का इस्तेमाल आगे चलकर NRC लागू करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने इसे ‘बैकडोर NRC’ बताया।

ओवैसी ने क्या कहा?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी शुरुआत से ही SIR का विरोध कर रही है। उनके मुताबिक यह केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आगे चलकर इसका इस्तेमाल नागरिकता की जांच के लिए किया जा सकता है।

ओवैसी ने आरोप लगाया कि अगर SIR के आधार पर आगे NRC की प्रक्रिया शुरू की गई तो लोगों को दोबारा दस्तावेज दिखाने और अपनी नागरिकता साबित करने की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। ये ओवैसी के आरोप और राजनीतिक दावे हैं; चुनाव आयोग की ओर से SIR को मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के तौर पर पेश किया गया है।

27 सितंबर को भी दी थी चेतावनी

ओवैसी इससे पहले 27 सितंबर को भी SIR को लेकर देश के नागरिकों से सावधानी बरतने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि लोग इस प्रक्रिया को हल्के में न लें और मतदाता सूची में अपना नाम जरूर जांचें।

उन्होंने दावा किया था कि लापरवाही की स्थिति में लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित होना पड़ सकता है। ओवैसी ने यह भी कहा था कि मामला केवल मतदान के अधिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में नागरिकता को लेकर भी परेशानी पैदा हो सकती है।

मुंबई में CJP का प्रदर्शन

इसी बीच SIR और चुनाव आयोग को लेकर मुंबई में आज कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP प्रदर्शन करने वाली है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के मुताबिक प्रदर्शन शुक्रवार शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क से शुरू होना है।

CJP ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में जवाबदेही बढ़ाने और 2025 की मतदाता सूची को फ्रीज करने समेत अन्य मांगें भी रखी हैं। पार्टी ने अपने आंदोलन को आगे देश के दूसरे शहरों तक ले जाने की बात कही है।

SIR को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद

SIR के दौरान मतदाता सूचियों में हुए बदलावों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और संगठनों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि SIR मतदाता सूचियों को अपडेट करने और अपात्र, मृत या स्थान बदल चुके मतदाताओं से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा की प्रक्रिया है।

ऐसे में SIR को लेकर ओवैसी और अन्य विपक्षी समूहों के आरोपों तथा चुनाव आयोग के आधिकारिक पक्ष के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। आने वाले दिनों में मतदाता सूची और SIR की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।