विश्व बाघ दिवस पर NTCA ने कान्हा टाइगर रिजर्व के मनोज मिश्रा को किया सम्मानित, पर्यटन प्रबंधन में उत्कृष्ट योगदान की सराहना
विश्व बाघ दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मियों को सम्मानित किया। इसी क्रम में कान्हा टाइगर रिजर्व के मनोज मिश्रा को पर्यटन प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।
मनोज मिश्रा को यह सम्मान कान्हा टाइगर रिजर्व में पर्यटन गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित करने, पर्यटकों को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने और जंगल सफारी व्यवस्था को प्रभावी बनाने में उनके योगदान के लिए दिया गया। उनके प्रयासों से कान्हा में पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा मिला है।
कान्हा टाइगर रिजर्व बना संरक्षण की मिसाल
मध्य प्रदेश स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख बाघ अभयारण्यों में शामिल है। यह क्षेत्र बाघों के साथ-साथ बारहसिंगा, तेंदुआ, जंगली कुत्ते और कई अन्य वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है। यहां बाघ संरक्षण के साथ उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
कान्हा में वन विभाग द्वारा बाघों की निगरानी, जंगलों की सुरक्षा और वन्यजीवों के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बेहतर प्रबंधन और संरक्षण योजनाओं के कारण यह टाइगर रिजर्व देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बना चुका है।
वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा
कान्हा टाइगर रिजर्व में पर्यटन को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे संरक्षण जागरूकता से भी जोड़ा गया है। यहां आने वाले पर्यटकों को जंगल, वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में जानकारी दी जाती है।
सही पर्यटन प्रबंधन से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। गाइड, वाहन चालक, होटल और होमस्टे संचालकों सहित कई लोग पर्यटन गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
NTCA का संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देने पर जोर
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण देशभर में बाघों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के लिए काम करता है। विश्व बाघ दिवस के मौके पर ऐसे लोगों को सम्मानित करना, जो जमीन स्तर पर संरक्षण कार्यों में योगदान दे रहे हैं, वन्यजीव सुरक्षा के प्रयासों को और मजबूती देता है।
बाघ संरक्षण केवल बाघों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जंगलों, जैव-विविधता और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने से जुड़ा हुआ है। कान्हा टाइगर रिजर्व में किए जा रहे संरक्षण कार्य इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण पेश करते हैं।
विश्व बाघ दिवस पर मिला यह सम्मान न केवल मनोज मिश्रा के योगदान की पहचान है, बल्कि उन सभी वनकर्मियों और संरक्षण कार्यकर्ताओं के प्रयासों का सम्मान भी है, जो देश के वन्यजीवों और जंगलों की सुरक्षा में लगातार जुटे हुए हैं।