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ओमप्रकाश राजभर के बयान को सपा गंभीरता से नहीं लेती, पहले वह अपनी पार्टी बचाएं : फखरुल हसन चांद

 

लखनऊ, 19 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुछ नेताओं द्वारा समाजवादी पार्टी (सपा) में संभावित टूट और कई सांसदों के संपर्क में होने के दावों पर सपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

सपा के नेता फखरुल हसन चांद ने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि ओमप्रकाश राजभर को पहले अपने दल की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। राजभर के बयान को सपा गंभीरता से नहीं लेती है।

उन्होंने आईएएनएस से कहा कि राजभर के पास कुल छह विधायक हैं, जिनमें एक वह स्वयं हैं और दूसरे उनके कथित पेपर लीक प्रकरण से जुड़े विधायक हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके शेष चार विधायक सपा का झंडा लगाकर घूमते हैं। राजभर की पार्टी स्वयं बिखराव की स्थिति में है और उनके पुत्र भी सपा प्रमुख अखिलेश यादव से पिछड़ों की राजनीति को बचाने तथा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के सपा में विलय की मांग कर रहे हैं।

उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि राजभर भाजपा के दबाव में हैं और जो बातें भाजपा की ओर से उन्हें बताई जाती हैं, वही सार्वजनिक रूप से दोहराते हैं। इसलिए सपा उनके किसी भी बयान या दावे को गंभीरता से नहीं लेती।

इसी बीच, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को कानूनी नोटिस भेजकर चंदे का पूरा ब्योरा मांगे जाने के मामले पर भी फखरुल हसन चांद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता होना बेहद आवश्यक है। इस मुद्दे को सबसे पहले सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने देश के सामने उठाया था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही है, इसलिए समाजवादी पार्टी इस विषय पर फिलहाल कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं करेगी।

फखरुल हसन चांद ने भाजपा पर राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कार्य करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा विपक्षी नेताओं के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है और ऐसा प्रतीत होता है कि वह बदले की राजनीति में विश्वास करती है। विपक्षी नेताओं की सुरक्षा में कटौती की जा रही है, जबकि सरकार के पक्ष में रहने वालों को विशेष सुरक्षा प्रदान की जा रही है। उत्तर प्रदेश में सरकार की विचारधारा से जुड़े कई बड़े माफिया सुरक्षा घेरे में घूम रहे हैं।

उन्होंने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा और उनके स्टाफ में कटौती का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में इस प्रकार की कार्रवाई स्वीकार्य नहीं हो सकती। लोकतंत्र की मजबूती के लिए सत्ता और विपक्ष दोनों का सम्मान जरूरी है, लेकिन भाजपा का लोकतांत्रिक मूल्यों में भरोसा नहीं दिखाई देता।

नीट परीक्षा को लेकर हुई उच्चस्तरीय बैठक और अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देशों पर भी सपा नेता ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिन मंत्रियों के कार्यकाल में दो बार नीट का पेपर लीक हो चुका है, वही अब सख्त निर्देश देने की बात कर रहे हैं। सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही है। जिस सरकार में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आती हैं और संबंधित मंत्री इस्तीफा देने को तैयार नहीं होते, वह केवल बैठकों और निर्देशों तक ही सीमित रह जाती है।

वहीं, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी द्वारा किसी भी राजनीतिक गठबंधन में शामिल होने की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए फखरुल हसन चांद ने कहा कि इससे इंडिया गठबंधन और अधिक मजबूत होगा।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम