ओम प्रकाश राजभर ने किया सीएम योगी के 'रामराज्य' बयान का समर्थन, अखिलेश यादव पर साधा निशाना
लखनऊ, 20 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'भारत में रामराज्य की अनुभूति' टिप्पणी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के कई देश युद्ध से जूझ रहे हैं, भारत में सभी लोग अपने-अपने हिसाब से अपने त्योहार को मना रहे हैं।
ओम प्रकाश राजभर ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "पूरी दुनिया युद्ध से जूझ रही है। भारत में लोग शांति और अमन-चैन के साथ रह रहे हैं, ये बड़ी चीज है। नवरात्रि मनाने वाले लोग नवरात्रि मना रहे हैं और रमजान वाले लोग अपने हिसाब से ईद मना रहे हैं। कहीं कोई विवाद नहीं है।"
इसी बीच, समाजवादी पार्टी की ओर से कृषि क्षेत्र को लेकर सवाल उठाने पर ओमप्रकाश राजभर ने कहा, "अखिलेश यादव के पास सरकार के खिलाफ सवाल उठाने के अलावा कोई काम नहीं है। देश में आमद बढ़ती जा रही है। अगर पैदावार ज्यादा होती है तो अखिलेश यादव को बुरा लगता है। अगर पैदावार न हो तब भी उन्हें बुरा लगता है। विपक्ष में बैठकर वे चाहे आलू के सवाल पर बोलें या गन्ना और किसान की बात करें, सरकार अपना काम कर रही है और वे अपना काम कर रहे हैं।"
उन्होंने पश्चिम बंगाल समेत चुनावी राज्यों में अफसरों के तबादलों को लेकर भी अखिलेश यादव के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा, "अब अखिलेश यादव घूम-घूमकर प्रमाण पत्र बांट रहे हैं। अब चुनाव अखिलेश यादव की बुद्धि से होगा या ममता बनर्जी की बुद्धि से होगा? चुनाव आयोग जहां समझ रहा है कि यहां निष्पक्ष चुनाव उन अधिकारियों के नेतृत्व में नहीं हो सकता है, वहां वह दूसरी व्यवस्था दे रहा है।"
फिल्म 'धुरंधर-2' में अतीक अहमद को आईएसआई एजेंट के रूप में दिखाए जाने पर सपा के आरोपों को लेकर उन्होंने कहा, "फिल्म सरकार नहीं बनाती है। कलाकार फिल्मों को बनाते हैं और फिल्म कैसे चले उसी हिसाब से फिल्म का निर्माण करते हैं।"
अमीर ओबीसी, एससी और एसटी को आरक्षण से बाहर किए जाने की मांग का ओम प्रकाश राजभर ने समर्थन किया। उन्होंने कहा, "जो लोग आर्थिक आधार पर मजबूत हो चुके हैं, उन्हें आरक्षण से अलग किया जाए और जो कमजोर हैं, उन्हें आरक्षण की व्यवस्था दी जाए।"
राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और राजद में विवाद पर ओम प्रकाश राजभर ने कहा, "वोट देने के बाद अलग-अलग आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा सकते हैं, लेकिन उन्हें पहले अपनी बात रखनी चाहिए थी। नामांकन से पहले या नामांकन के बाद उन्हें कहना चाहिए था कि कांग्रेस के नेताओं ने हमसे बात क्यों नहीं की। हम लोग वोट नहीं देंगे। इसीलिए चुनावों से पहले बात उठानी चाहिए थी।"
--आईएएनएस
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