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भारत के लिए अक्टूबर कूटनीति का व्यस्त महीना, जानें कौन सी तारीख है खास!

 

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। अक्टूबर ने दस्तक दे दी है। भारतीय कूटनीति के लिहाज से ये भी काफी गतिविधियों से परिपूर्ण रहेगा, ठीक सितंबर की तरह! सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के दौरान सक्रिय रही भारतीय कूटनीति इस महीने भी नई दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण रहने वाली है।

इस महीने भारत के कूटनीतिक एजेंडे में यूरोप, अमेरिका, हिंद-प्रशांत और बहुपक्षीय मंचों से जुड़े कई अहम कार्यक्रम हैं। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन की भारत यात्रा (5 से 7 अक्टूबर) से लेकर भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के एक साल पूरे होने, अमेरिका के साथ उच्चस्तरीय संपर्क, क्वाड और जी20 की बैठकों (30 से 31 अक्टूबर 2026 विदेश मंत्रियों की) जैसे कई मुद्दे चर्चा में रहेंगे।

अक्टूबर की शुरुआत भारत-ईएफटीए संबंधों के लिए खास महत्व रखती है। भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच टीईपीए 1 अक्टूबर 2025 को लागू हुआ था। इस समझौते में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। समझौते का पहला साल पूरा होने के साथ दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश और बाजार पहुंच से जुड़े परिणामों पर नजर रहेगी।

टीईपीए के तहत ईएफटीए ने भारत में अगले 15 वर्षों के दौरान 100 अरब डॉलर के निवेश और एक लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजन की प्रतिबद्धता जताई है। ऐसे में समझौते की पहली वर्षगांठ भारत और यूरोपीय देशों के बीच आर्थिक कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।

इसी संदर्भ में स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन की तीन दिवसीय भारत यात्रा पर भी नजर रहेगी। पार्मेलिन 2026 में स्विस परिसंघ के राष्ट्रपति हैं। भारत और स्विट्जरलैंड के बीच आर्थिक संबंधों के अलावा नवाचार, प्रौद्योगिकी, कौशल, शिक्षा और निवेश जैसे क्षेत्र भी द्विपक्षीय एजेंडे का हिस्सा हैं।

अक्टूबर में भारत-अमेरिका संबंध भी कूटनीतिक गतिविधियों के केंद्र में रह सकते हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की भारत यात्रा की संभावना है। यदि यात्रा होती है तो बातचीत में द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों के साथ व्यापार, रक्षा, इंडो-पैसिफिक, महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियां तथा वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल हो सकते हैं।

क्वाड के स्तर पर भी अक्टूबर में विदेश मंत्रियों की संभावित बैठक पर नजर रहेगी। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के इस समूह में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति और स्थिरता, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और आपदा राहत जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं।

हालांकि क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक मई 2026 में नई दिल्ली और जुलाई में मनीला में हो चुकी है, इसलिए अक्टूबर में संभावित किसी बैठक को लेकर आधिकारिक घोषणा को अंतिम आधार माना जाएगा।

बहुपक्षीय कूटनीति के मोर्चे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अमेरिका यात्रा भी अक्टूबर के अंत में महत्वपूर्ण हो सकती है। अमेरिका के अटलांटा में 30 और 31 अक्टूबर को जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक प्रस्तावित है। बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था, बहुपक्षीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

भारत के लिए जी20 मंच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली वैश्विक दक्षिण, विकासशील देशों की प्राथमिकताओं, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा और बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार जैसे मुद्दों को लगातार प्रमुखता देती रही है।

उधर, मध्य एशिया में शंघाई सहयोग संगठन की गतिविधियां भी अक्टूबर में भारत के कूटनीतिक एजेंडे का हिस्सा रहेंगी। 19-20 अक्टूबर को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में एससीओ के सदस्य देशों के शासनाध्यक्षों की बैठक प्रस्तावित है। भारत एससीओ का सदस्य होने के नाते इस मंच के जरिए मध्य एशिया, क्षेत्रीय संपर्क, व्यापार, आर्थिक सहयोग और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी भागीदारी जारी रखेगा।

एससीओ भारत के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि यह मंच मध्य एशिया, रूस और चीन समेत व्यापक यूरेशियाई क्षेत्र के देशों को एक साथ लाता है। भारत इस मंच पर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, कनेक्टिविटी, आर्थिक सहयोग और सदस्य देशों के बीच लोगों के संपर्क को बढ़ावा देने जैसे मुद्दे उठाता रहा है।

--आईएएनएस

केआर/