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एनएसईएल घोटाले में ईडी ने 19.12 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति जब्त की

 

मुंबई, 27 मार्च (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोनल ऑफिस ने नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) घोटाले के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 19.12 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है।

ईडी ने इस मामले की जांच मुंबई के एम.आर.ए. मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत एनएसईएल, उसके निदेशकों, प्रमुख अधिकारियों और 25 डिफॉल्टरों के खिलाफ जांच चल रही है।

पीएमएलए के तहत ईडी की जांच में सामने आया कि एनएसईएल और उसके डिफॉल्टर सदस्यों ने बिना किसी वास्तविक स्टॉक के कमोडिटी ट्रेडिंग की अनुमति देकर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी की। इस घोटाले में लगभग 13,000 निवेशकों के साथ करीब 5600 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई थी।

जांच के दौरान पता चला कि एनएसईएल के तीन प्रमुख डिफॉल्टर सदस्य ने प्लेटफॉर्म पर धान की काल्पनिक और फर्जी बिक्री के लेन-देन के जरिए धोखाधड़ी से पैसे हासिल किए। एलओआईएल ग्रुप की कंपनियों पर एनएसईएल का कुल बकाया 720.30 करोड़ रुपए था। बैंक खातों की जांच से यह स्पष्ट हुआ कि एलओआईएल ग्रुप की संस्थाओं के एनएसईएल सेटलमेंट खातों से लगभग 569.04 करोड़ रुपए की रकम निकाल ली गई थी।

इस निकाली गई राशि का एक बड़ा हिस्सा लक्ष्मी एनर्जी एंड फूड लिमिटेड समेत ग्रुप की अन्य कंपनियों के माध्यम से घुमाया गया। इस पैसे का इस्तेमाल बैंक कर्ज चुकाने, कारोबारी गतिविधियों, वर्किंग कैपिटल और अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया।

ईडी ने अब तक इस पूरे एनएसईएल मामले में कुल 34 अस्थायी जब्ती आदेश जारी किए हैं, जिनके तहत लगभग 3452.06 करोड़ रुपए की विभिन्न संपत्तियों को जब्त किया जा चुका है। इसके अलावा, 148 आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए की विशेष अदालत में सात अभियोजन शिकायतें दायर की गई हैं, जिनका अदालत ने संज्ञान भी ले लिया है।

यह कार्रवाई एनएसईएल घोटाले में शामिल डिफॉल्टरों की संपत्तियों पर ईडी की लगातार सख्त कार्रवाई का हिस्सा है। ईडी का कहना है कि एलओआईएल ग्रुप द्वारा फर्जी ट्रेडिंग के जरिए प्राप्त धन को बाद में विभिन्न रूपों में परिवर्तित करके कानूनी चोले में ढाला गया था, जिसे अब अपराध से अर्जित संपत्ति माना गया है।

--आईएएनएस

एससीएच