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नॉर्वे के उप विदेश मंत्री की तेहरान यात्रा, आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर विदेश मंत्री अराघची से की मुलाकात

 

नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। नॉर्वे के उप विदेश मंत्री एंड्रियास क्राविक ने मंगलवार को तेहरान का दौरा क‍िया। इस दौरान उन्‍होंने मंगलवार शाम ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्‍बास अराघची से मुलाकात की। यह बैठक परामर्श और आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर आधार‍ित रही।

ईरान इस्लामिक रिपब्लिक की सरकार के ऑफिशियल 'एक्‍स' अकाउंट के अनुसार, परामर्श के लिए तेहरान की यात्रा पर आए नॉर्वे के उप विदेश मंत्री एंड्रियास क्राविक ने मंगलवार शाम को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्‍बास अराघची से मुलाकात की।

युद्ध के तनावपूर्ण हालातों के बीच ईरान अपने ह‍ितों की रक्षा के ल‍िए डटकर खड़ा हुआ है। इसके साथ ही अन्‍य देशों से अपने रिश्तों को मजबूत करने का प्रयास भी कर रहा है। मंगलवार को नॉर्वे के उप विदेश मंत्री से मुलाकात का मकसद भी रिश्तों को मजबूत करने को लेकर ही रहा।

ईरान इस्लामिक रिपब्लिक की सरकार के ऑफिशियल 'एक्‍स' अकाउंट से साझा की गई जानकारी के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्‍बास अराघची भारत का दौरा भी करेंगे। अराघची 'ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक' में शामिल होने के लिए नई दिल्ली की यात्रा करेंगे।

ईरान को उम्‍मीद है क‍ि इस यात्रा के दौरान वे भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अन्य समकक्षों से मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता, बहुपक्षीय सहयोग और आर्थिक लचीलेपन पर चर्चा करेंगे।

एक तरफ ईरान के व‍िदेश मंत्री अराघची भारत की यात्रा की तैयारी में हैं, तो वहीं दूसरी तरफ अमेर‍िकी राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप का चीन दौरा प्रस्‍ताव‍ित है। ये यात्राएं ऐसे समय पर हो रही हैं जब दोनों देशों के बीच जारी युद्धविराम पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

एक द‍िन पहले ही सोमवार को अमेर‍िकी राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप ने ईरान के नए परमाणु प्रस्ताव को 'कचरे का एक टुकड़ा' बताते हुए खारिज कर दिया। ट्रंप ने कहा कि तेहरान की परमाणु वार्ता में दी गई नई प्रतिक्रिया 'पूरी तरह अस्वीकार्य' है। यह एक बेवकूफी भरा प्रस्ताव है।

ट्रंप ने बताया कि ईरान पहले इस बात पर सहमत हुआ था कि हाल ही में अमेरिकी सैन्य हमलों से क्षतिग्रस्त संवर्धन (एनरिचमेंट) सुविधाओं से 'परमाणु धूल' हटाने की अनुमति देगा, लेकिन बाद में उसने अपना रुख बदल दिया।

ट्रंप के अनुसार, बाद में ईरानी अधिकारी इस समझौते से पीछे हट गए क्योंकि वे इसे लिखित रूप में नहीं देना चाहते थे। उन्होंने कहा कि अमेरिका की स्थिति वही है, जो पहले थी। मेरा बहुत सीधा-सादा प्लान है: ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए, हम दुनिया की सेवा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा क‍ि मैं कहूंगा कि युद्धविराम बहुत कमजोर हालत में है। जैसे डॉक्टर आए और कहे कि आपके मरीज के बचने की सिर्फ एक प्रत‍िशत संभावना है।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम