×

E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने का कोई सबूत नहीं, संसद में सरकार का दावा; वीडियो में जाने 23 करोड़ से ज्यादा वाहनों के डेटा का दिया हवाला

 

देश में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20 Fuel) को लेकर उठ रही आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि इस ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों के इंजन खराब होने या अचानक बंद होने की कोई पुख्ता रिपोर्ट सामने नहीं आई है। सरकार ने कहा कि देशभर में 23 करोड़ से अधिक वाहनों के संचालन के अनुभव और कई वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है। राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने यह जानकारी दी।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/TNBWVTCQJ-I?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/TNBWVTCQJ-I/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

E20 फ्यूल से इंजन को नुकसान का कोई प्रमाण नहीं

मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि अब तक उपलब्ध आंकड़ों और वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार E20 फ्यूल के कारण इंजन खराब होने, इंजन फेल होने या वाहन के अचानक बंद होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।उन्होंने बताया कि सरकार लगातार एथेनॉल मिश्रित ईंधन के प्रभावों पर नजर बनाए हुए है और अब तक प्राप्त रिपोर्टों में किसी बड़े तकनीकी नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

23 करोड़ से ज्यादा वाहनों के आंकड़ों का विश्लेषण

सरकार के अनुसार, वर्तमान में देश में:

  • 20 करोड़ से अधिक टू-व्हीलर E20 मिश्रित ईंधन का उपयोग कर रहे हैं।
  • 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें भी एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर चल रही हैं।

इनमें बड़ी संख्या ऐसे वाहनों की भी है, जिनका निर्माण E20 सर्टिफिकेशन लागू होने से पहले किया गया था। इसके बावजूद उनके संचालन और सर्विस रिकॉर्ड में एथेनॉल मिश्रण के कारण किसी व्यापक तकनीकी समस्या की पुष्टि नहीं हुई।

पुराने वाहनों पर भी नहीं मिला नकारात्मक असर

राज्य मंत्री ने बताया कि पुराने मॉडलों के वाहनों के डेटा और सर्विस रिकॉर्ड का भी अध्ययन किया गया। जांच में यह सामने आया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण इंजन फेल होने या बड़े स्तर पर वाहन खराब होने जैसी घटनाओं का कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं मिला।सरकार का कहना है कि E20 फ्यूल को चरणबद्ध तरीके से अपनाने से पहले व्यापक परीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन किया गया था।

क्यों बढ़ाया जा रहा है एथेनॉल का इस्तेमाल?

केंद्र सरकार देश में एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दे रही है ताकि:

  • कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो।
  • प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी आए।
  • किसानों की आय बढ़ाने के लिए गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों से एथेनॉल उत्पादन को प्रोत्साहन मिले।
  • ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

सरकार ने दूर की आशंकाएं

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर E20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान होने की आशंकाएं जताई जा रही थीं। हालांकि, सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों, वाहन निर्माताओं से प्राप्त जानकारी और करोड़ों वाहनों के वास्तविक संचालन के अनुभवों में ऐसी किसी व्यापक समस्या की पुष्टि नहीं हुई है।सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर निगरानी और अध्ययन आगे भी जारी रहेगा, ताकि उपभोक्ताओं के हितों और वाहन सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर लगातार नजर रखी जा सके।