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नीतीश के वीडियो पर बढ़ा विवाद, जेडीयू नेता नीरज कुमार ने प्रशांत किशोर के खिलाफ दर्ज कराई एफआईआर

 

पटना, 29 जुलाई (आईएएनएस)। बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के मतदान से एक दिन पहले बुधवार को जन सुराज के संस्थापक एवं उम्मीदवार प्रशांत किशोर के खिलाफ शास्त्रीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है।

जनता दल (यूनाइटेड) के विधान पार्षद और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने थाना प्रभारी को लिखित शिकायत सौंपते हुए प्रशांत किशोर पर पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के वीडियो संदेश को एआई से तैयार बताया जाने संबंधी बयान को झूठा, भ्रामक और चुनावी माहौल प्रभावित करने वाला बताते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

शिकायत में कहा गया है कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान 30 जुलाई को होना है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार की ओर से मतदाताओं के नाम एक वीडियो संदेश जारी किया गया था, जिसमें उन्होंने एनडीए समर्थित भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के पक्ष में मतदान की अपील की थी।

शिकायत में इस वीडियो को पूरी तरह प्रामाणिक बताया गया है, लेकिन प्रशांत किशोर ने भाजपा पर वीडियो को फर्जी, एआई से तैयार कर जारी करने का आरोप लगाया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रशांत किशोर ने यह दावा किया कि वीडियो नकली है, एआई की मदद से तैयार किया गया है, और भाजपा ने चुनावी लाभ लेने के उद्देश्य से इसे आधिकारिक तौर पर जारी किया है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह के आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं तथा इनका उद्देश्य मतदान से ठीक पहले मतदाताओं को भ्रमित करना और भाजपा उम्मीदवार को मिल रहे समर्थन को बदनाम करना है। नीरज कुमार ने शिकायत में यह भी कहा है कि इस तरह के आरोपों से भाजपा, जदयू और जन सुराज समर्थकों के बीच अविश्वास तथा तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

उन्होंने आशंका जताई कि चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में इस प्रकार की भ्रामक जानकारी के प्रसार से कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है और राजनीतिक टकराव की संभावना बढ़ सकती है। शिकायत में संबंधित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल जांच की मांग भी की गई है।

शास्त्रीनगर थाने में शिकायत सौंपने के बाद मीडिया से बातचीत में नीरज कुमार ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सार्वजनिक जीवन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि किसी प्रामाणिक वीडियो को बिना किसी आधार के कृत्रिम या एआई से निर्मित बताना सार्वजनिक जीवन का अपमान है और इसकी विधिवत जांच होनी चाहिए।

नीरज कुमार ने कहा कि उनकी समझ के अनुसार इस मामले में भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की विभिन्न धाराएं लागू हो सकती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कौन-सी धाराएं लगाई जाएंगी, इसका निर्णय पुलिस अपने अधिकार क्षेत्र और जांच के आधार पर करेगी। उन्होंने पुलिस से शिकायत पर विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए मामले की जांच करने और आवश्यक कानूनी कदम उठाने का अनुरोध किया।

--आईएएनएस

एमएनपी/एसके