☰
×

दिल्ली-NCR में निर्भया जैसी हैवानियत: सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सवाल, चलती बस में नाबालिग से दुष्कर्म पर लगाई फटकार

 

दिल्ली-NCR में नाबालिग लड़कियों के साथ हुई यौन हिंसा की तीन गंभीर घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इन मामलों पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। जिन तीन घटनाओं का जिक्र सुनवाई के दौरान हुआ, उनमें ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जा रही बस में नाबालिग से गैंगरेप, स्वरूप नगर में नाबालिग से गैंगरेप के बाद हत्या और कालकाजी के पास आस्था कुंज पार्क में नाबालिग से गैंगरेप का मामला शामिल है।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने इन घटनाओं पर चिंता जताते हुए 2012 के निर्भया कांड का भी जिक्र किया। कोर्ट ने सवाल उठाया कि इतने सालों बाद भी अगर महिलाओं और नाबालिगों को सार्वजनिक जगहों पर इस तरह की घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है, तो क्या 2012 की उस भयावह घटना से पर्याप्त सबक लिया गया है?

पहला मामला—चलती बस में नाबालिग से गैंगरेप

पहला मामला 4 अगस्त का है। आरोप है कि ग्रेटर नोएडा के परी चौक से दिल्ली जा रही एक बस में 16 साल की नाबालिग छात्रा के साथ गैंगरेप किया गया। बताया गया कि पीड़िता बस में सवार हुई थी और आरोपियों ने उसे कश्मीरी गेट के पास उतार दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान बस करीब 47 किलोमीटर तक चलती रही। बस की खिड़कियों पर पर्दे लगे होने की बात भी सामने आई है। इस घटना ने सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।

दूसरा मामला—गैंगरेप के बाद नाबालिग की हत्या

दूसरी घटना 12 सितंबर को दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके में सामने आई। यहां 16 साल की नाबालिग के साथ कथित तौर पर गैंगरेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई। अगले दिन उसका शव खेत के पास खुले मैदान में मिला।

इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें तीन आरोपी नाबालिग बताए गए हैं। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और अपराध पर पुलिस की निगरानी को लेकर सवाल उठे।

तीसरा मामला—आस्था कुंज पार्क में फर्जी पुलिस बनकर वारदात

तीसरी घटना 21 सितंबर की है। दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में 17 साल की नाबालिग अपने दोस्त के साथ बैठी थी। आरोप है कि तीन युवक वहां पहुंचे और खुद को पुलिसकर्मी बताकर दोनों को डराया। इसके बाद आरोपियों ने नाबालिग के साथ गैंगरेप किया।

पुलिस ने इस मामले में आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान पुलिस की कार्रवाई भी सामने आई और 22 सितंबर को एक आरोपी के साथ मुठभेड़ की घटना हुई, जिसमें वह घायल हुआ। मौके से बाइक और पिस्टल बरामद किए जाने की बात पुलिस की ओर से सामने आई।

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की पेट्रोलिंग पर उठाए सवाल

इन घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि पार्क, सड़क, बस, मेट्रो स्टेशन और सब-वे जैसी जगहों पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि कम पुलिस गश्त या निगरानी की कमी की वजह से सार्वजनिक स्थानों को असुरक्षित नहीं छोड़ा जा सकता। आस्था कुंज पार्क की घटना का जिक्र करते हुए कोर्ट के सामने यह बात भी रखी गई कि LSR कॉलेज की छात्राओं की ओर से पहले यौन उत्पीड़न की शिकायतें किए जाने की बात सामने आई थी।

कोर्ट ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को उनके संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि हिंसा से मुक्त होकर सम्मान के साथ जीवन जीना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का हिस्सा है।

दिल्ली में बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं

NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में दिल्ली में POCSO एक्ट के तहत 1,553 मामले दर्ज किए गए थे। यानी औसतन हर दिन चार से ज्यादा मामले दर्ज हुए। हालांकि 2025 के आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं।

इन मामलों और आंकड़ों के बीच सुप्रीम कोर्ट की चिंता सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर है। अब कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से इन घटनाओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा है।

फिलहाल इन तीन मामलों की जांच और कानूनी कार्रवाई अलग-अलग स्तर पर जारी है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद दिल्ली-NCR में सार्वजनिक जगहों पर पुलिस पेट्रोलिंग, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जवाबदेही का मुद्दा भी सामने आया है।