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राजस्थान में बहुभाषी शिक्षा की नई पहल, किताबों में शामिल होंगे स्थानीय शब्द

 

राजस्थान में स्कूली शिक्षा को अधिक प्रभावी और बच्चों के लिए सहज बनाने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने एक नई पहल की शुरुआत की है। इसके तहत अब सरकारी स्कूलों की किताबों में स्थानीय भाषा और बोलियों के शब्द शामिल किए जाएंगे, ताकि बच्चे अपनी मातृभाषा के माध्यम से बेहतर तरीके से सीख सकें।

इस योजना के अंतर्गत बच्चे अब पाठ्यपुस्तकों में ‘लाडू’, ‘रोटलो’ और ‘मोटो बापो’ जैसे स्थानीय शब्दों को पढ़ेंगे। शिक्षा विभाग का मानना है कि जब बच्चों को उनकी अपनी भाषा और परिवेश से जुड़े शब्दों के माध्यम से पढ़ाया जाता है, तो वे अवधारणाओं को जल्दी और बेहतर तरीके से समझ पाते हैं।

यह पहल बहुभाषी शिक्षा परियोजना के तहत शुरू की गई है, जिसे फिलहाल राज्य के 11 जिलों में लागू किया जाएगा। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे राजस्थान में विस्तार दिया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य शिक्षा को अधिक समावेशी और बच्चों के अनुकूल बनाना है।

इस कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय संगठनों का भी सहयोग प्राप्त हो रहा है। इसमें संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ), रूम टू रीड और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन जैसी संस्थाएं शामिल हैं, जो शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए काम कर रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बहुभाषी शिक्षा बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ सीखने की प्रक्रिया को भी सरल बनाती है। इससे न केवल बच्चों की समझ में सुधार होगा, बल्कि ड्रॉपआउट दर को भी कम करने में मदद मिलेगी।

शिक्षा विभाग का यह कदम राजस्थान में शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जो बच्चों को उनकी जड़ों से जोड़ते हुए आधुनिक शिक्षा प्रणाली की ओर आगे बढ़ाने में मदद करेगा।