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नेपाल की ‘दर्द की दीवार’... जहां लगी हैं 2 हजार से ज्यादा तस्वीरें, हर चेहरे के पीछे एक परिवार की उम्मीद

 

दीवारें आमतौर पर ईंटों और सीमेंट से बनती हैं, लेकिन नेपाल में एक ऐसी दीवार है, जिस पर हजारों परिवारों की उम्मीदें टिकी हुई हैं। इस दीवार पर लगी हर तस्वीर के पीछे किसी की दर्द भरी कहानी है। किसी का बेटा लापता है, किसी का पति, किसी की मां तो किसी के पिता का अब तक कोई पता नहीं।

यह सिर्फ तस्वीरों से बनी कोई साधारण दीवार नहीं है। यहां हर फोटो के साथ एक परिवार की उम्मीद भी चिपकी हुई है। कोई मां अपने बेटे के लौटने का इंतजार कर रही है, तो कोई बच्चा अपने पिता के वापस आने की राह देख रहा है। किसी सुहागन की आंखें अपने पति की तस्वीर में ही उसकी वापसी की उम्मीद तलाश रही हैं।

यह भावुक कर देने वाला दृश्य नेपाल की राजधानी काठमांडू के महाराजगंज स्थित त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के बाहर देखने को मिल रहा है। अस्पताल के आसपास मौजूद करीब 25 मीटर लंबी और लगभग 80 फीट ऊंची दीवार पर लापता लोगों की तस्वीरें लगाई गई हैं।

हर तस्वीर के पीछे एक परिवार की कहानी

दीवार पर जहां तक नजर जाती है, वहां लोगों की तस्वीरें दिखाई देती हैं। अलग-अलग उम्र के नेपाली नागरिकों के साथ विदेशी नागरिकों की तस्वीरें भी यहां लगाई गई हैं। परिवार अपने लापता परिजनों की तस्वीरें दीवार पर लगाकर इस उम्मीद में लौट रहे हैं कि शायद किसी की नजर उन तस्वीरों पर पड़े और उनके अपनों के बारे में कोई जानकारी मिल सके।

एक दीवार का वजन उसकी ईंटों और निर्माण सामग्री से मापा जा सकता है, लेकिन इस दीवार पर मौजूद तस्वीरों का भार सिर्फ किलो में नहीं मापा जा सकता। इसमें हजारों परिवारों का दर्द, बेचैनी और उम्मीद शामिल है।

त्रासदी के बाद अपनों की तलाश

चीन-नेपाल सीमा के पास हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के बाद बर्फीले पानी और मलबे की तेज लहरों ने भारी तबाही मचाई। इस प्राकृतिक आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई, जबकि हजारों लोग लापता बताए जा रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस त्रासदी में 900 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और करीब 4,500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में लगभग 600 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं।

ऐसे मुश्किल वक्त में त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के बाहर की यह दीवार उन परिवारों की आखिरी उम्मीद बन गई है, जो आज भी अपने अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

तस्वीरें भले ही कागज पर लगी हों, लेकिन हर तस्वीर के साथ किसी परिवार की धड़कन जुड़ी हुई है। कोई यहां अपने पिता को खोज रहा है, कोई मां को, कोई जीवनसाथी को और कोई अपने बच्चे को। इस दीवार को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी प्राकृतिक आपदा का दर्द सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की आंखों में भी दिखाई देता है।