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Nepal सुरंग हादसा: 9 दिन बिना खाने के ज़िंदा निकले मज़दूर, जानें मानव शरीर की सहनशक्ति का वैज्ञानिक सच

 

नेपाल में बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे दो लोगों को नौ दिन बाद सुरक्षित जिंदा बाहर निकाल लिया गया। यह घटना हैरान करने वाली होने के साथ-साथ यह सवाल भी खड़ा करती है कि आखिर इंसान का शरीर कई दिनों तक भोजन के बिना कैसे काम करता रहता है? पानी की कमी कितनी जल्दी जानलेवा बन सकती है और अगर कोई व्यक्ति मलबे, सुरंग या किसी बंद जगह में फंस जाए तो उसके बचने की संभावना कैसे बढ़ सकती है?

विशेषज्ञों के मुताबिक, इंसानी शरीर लंबे समय तक भोजन न मिलने की स्थिति से निपटने के लिए अपनी ऊर्जा व्यवस्था में कई बदलाव करता है। शुरुआत में शरीर खून में मौजूद ग्लूकोज का इस्तेमाल करता है। इसके बाद लिवर और मांसपेशियों में जमा ग्लाइकोजन ऊर्जा का स्रोत बनता है।

जब ग्लाइकोजन का भंडार कम होने लगता है तो शरीर ऊर्जा के लिए जमा फैट का इस्तेमाल शुरू कर देता है। लंबे समय तक खाना न मिलने पर शरीर ऊर्जा बचाने के लिए मेटाबॉलिज्म को भी धीमा कर सकता है। स्थिति ज्यादा लंबी होने पर शरीर मांसपेशियों से भी ऊर्जा लेने लगता है।

हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि हर व्यक्ति नौ दिन या उससे ज्यादा समय तक बिना भोजन के सुरक्षित रह सकता है। किसी व्यक्ति की उम्र, वजन, स्वास्थ्य, तापमान, शारीरिक गतिविधि और सबसे बढ़कर पानी की उपलब्धता उसकी सर्वाइवल क्षमता को प्रभावित करती है।

डॉक्टर ने बताया- खाने से ज्यादा जरूरी है पानी

नोएडा स्थित यशार्थ हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. प्रखर गर्ग के मुताबिक, कई दिनों तक भोजन नहीं मिलने पर शरीर पहले ग्लूकोज और ग्लाइकोजन का इस्तेमाल करता है। इसके बाद ऊर्जा के लिए फैट टूटना शुरू होता है और शरीर की मेटाबॉलिक प्रक्रिया बदल जाती है।

लंबे समय तक भोजन न मिलने से कमजोरी, चक्कर, लो ब्लड शुगर, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और मांसपेशियों के कमजोर होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

डॉक्टर के मुताबिक, ऐसी परिस्थितियों में भोजन की कमी से भी ज्यादा गंभीर खतरा डिहाइड्रेशन का हो सकता है। शरीर में पानी की कमी बढ़ने पर ब्लड वॉल्यूम कम हो सकता है, ब्लड प्रेशर गिर सकता है और किडनी समेत दूसरे महत्वपूर्ण अंगों पर असर पड़ सकता है।

इसलिए नौ दिन तक बिना भोजन के रहना किसी तय सर्वाइवल लिमिट की तरह नहीं देखा जा सकता। अलग-अलग परिस्थितियों में हर व्यक्ति की स्थिति अलग हो सकती है।

पानी की कमी क्यों बन सकती है सबसे बड़ा खतरा?

शरीर कुछ समय तक अपने अंदर जमा ऊर्जा भंडार का इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन पानी की कमी ज्यादा तेजी से गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।

डिहाइड्रेशन बढ़ने पर मुंह सूखना, कमजोरी, चक्कर, पेशाब कम होना और दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर डिहाइड्रेशन की स्थिति में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है और ब्लड प्रेशर गिरने के साथ महत्वपूर्ण अंगों के काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

इसी वजह से किसी बंद जगह में फंसे व्यक्ति के लिए उपलब्ध सुरक्षित पानी बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, संदिग्ध या दूषित पानी पीने से संक्रमण और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए जहां संभव हो, सुरक्षित पानी को प्राथमिकता देना जरूरी है।

टनल एक्सपर्ट ने भी बताई सर्वाइवल की संभावना

नेपाल की मीडिया रिपोर्ट में अनूप काफले की सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए टनल एक्सपर्ट अर्नोल्ड डिक्स की राय साझा की गई है। इसमें बताया गया कि सुरंग के अंदर लंबे समय तक संपर्क न हो पाना या पूरी तरह सन्नाटा छा जाना अपने आप में मौत का संकेत नहीं माना जा सकता।

कई परिस्थितियों में लोग बंद सुरंग या भूमिगत जगहों में लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं। हालांकि, यह काफी हद तक वहां मौजूद हवा, पानी, तापमान, चोट की स्थिति और आसपास के वातावरण पर निर्भर करता है।

सुरंग या मलबे में फंस जाएं तो क्या करें?

अगर कोई व्यक्ति कभी सुरंग, मलबे या किसी बंद जगह में फंस जाए तो सबसे जरूरी चीज घबराहट पर नियंत्रण रखना है। घबराकर लगातार हिलने-डुलने या बाहर निकलने की कोशिश करने से शरीर की ऊर्जा और पानी तेजी से खर्च हो सकता है।

अगर जगह सुरक्षित है तो अनावश्यक गतिविधियां कम रखना बेहतर होता है। मोबाइल फोन उपलब्ध होने पर बैटरी का इस्तेमाल सोच-समझकर करें और बचाव दल से संपर्क करने की कोशिश करें।

बचाव दल को अपनी मौजूदगी का संकेत देने के लिए जरूरत के मुताबिक आवाज लगाई जा सकती है या किसी ठोस वस्तु पर नियंत्रित तरीके से संकेत दिया जा सकता है। लेकिन लगातार चिल्लाने से ऊर्जा और सांस दोनों की खपत बढ़ सकती है।

अगर आसपास धूल, धुआं या किसी गैस का खतरा हो तो संभव हो तो अपेक्षाकृत साफ हवा वाली जगह पर रहना चाहिए। वहीं, बाढ़ या तेजी से बढ़ते पानी की स्थिति में बिना जानकारी के सुरंग के अंदर आगे बढ़ना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।

नौ दिन बाद बचाव ने जगाई उम्मीद

नेपाल की यह घटना बताती है कि बेहद कठिन परिस्थितियों में भी इंसानी शरीर कुछ समय तक अपने ऊर्जा भंडार और उपलब्ध संसाधनों के सहारे काम कर सकता है। लेकिन सर्वाइवल की कोई एक तय समयसीमा नहीं होती।

ऐसी परिस्थितियों में पानी, सांस लेने के लिए पर्याप्त हवा, शरीर का तापमान, चोटों की स्थिति और बचाव दल तक पहुंच जैसी चीजें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए किसी भी व्यक्ति के लंबे समय तक जीवित रहने के उदाहरण को सामान्य नियम नहीं माना जाना चाहिए।