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नेपाल-तिब्बत बाढ़ त्रासदी: इशा फाउंडेशन ने लापता लोगों के परिजनों को भेजा भावुक अपडेट, कहा-जीवित बचे लोगों की उम्मीद बेहद कम

 

नई दिल्ली/काठमांडू, 29 अगस्त (आईएएनएस)। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद लापता लोगों के परिजनों को ईशा फाउंडेशन की ओर से एक भावुक और विस्तृत अपडेट जारी किया गया है। फाउंडेशन ने कहा है कि ग्यिरोंग पोर्ट क्षेत्र में चीनी अधिकारियों द्वारा खोज और बचाव अभियान जारी है, लेकिन अब तक मिले तथ्यों और जमीनी सूचनाओं के आधार पर जीवित बचे लोगों को लेकर कोई उत्साहजनक संकेत नहीं मिले हैं।

ईशा फाउंडेशन ने अपने संदेश में कहा कि अपडेट साझा करने में देरी इसलिए हुई क्योंकि वे केवल सत्यापित और विश्वसनीय जानकारी ही परिजनों तक पहुंचाना चाहते थे। इसके लिए टीम ने विभिन्न स्रोतों से जानकारी जुटाई और मौके पर मौजूद संपर्कों के माध्यम से उसकी पुष्टि की।

ईशा फाउंडेशन के अनुसार, ग्यिरोंग पोर्ट पर चीनी प्रशासन की ओर से बचावकर्मी उपकरणों के साथ तैनात हैं और खोज अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, 28 अगस्त को दूसरी बाढ़ के खतरे के कारण अभियान को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा था, जिसे बाद में स्थानीय समयानुसार दोपहर 12 बजे फिर से शुरू किया गया।

ईशा फाउंडेशन ने बताया कि ग्यिरोंग पोर्ट स्थित इमिग्रेशन ऑफिस का पूरा परिसर बाढ़ में बह गया है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीरों, वीडियो, उपग्रह चित्रों और स्थानीय लोगों से मिली सूचनाओं से इस भारी तबाही की पुष्टि हुई है। संस्था ने कहा कि अभी तक इमिग्रेशन कार्यालय क्षेत्र से किसी भी जीवित व्यक्ति के मिलने के संकेत नहीं मिले हैं।

ईशा फाउंडेशन की टीम सीमा के दोनों ओर तैनात है। चीन की ओर मौजूद टीम ग्यिरोंग साइट से करीब 25 किलोमीटर दूर उस स्थान पर है, जहां तक जाने की अनुमति है। यह टीम राहत और बचाव कार्य में जुटे अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। वहीं, नेपाल की ओर समन्वय टीम काठमांडू में मौजूद है, क्योंकि प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच फिलहाल प्रतिबंधित है। नेपाल में सड़कें और पुल बह जाने के कारण राहत कार्यों में भी मुश्किलें आ रही हैं।

ईशा फाउंडेशन ने बताया कि उसकी टीम भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय, काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों, नेपाली सेना की खोज एवं बचाव टीम, नेपाल पर्यटन पुलिस तथा अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है। लापता लोगों की जानकारी भी संबंधित बचाव एजेंसियों को उपलब्ध कराई गई है।

संस्था ने कहा कि बचाए गए लोगों की सूचियों का लगातार मिलान किया जा रहा है। अब तक चीन की ओर से जारी किसी भी आधिकारिक सूची में उनके समूह के किसी सदस्य का नाम नहीं मिला है। नेपाल सरकार द्वारा जारी बचाव सूचियों में भी समूह के किसी सदस्य की पहचान नहीं हो सकी है।

ईशा फाउंडेशन ने बताया कि स्वयंसेवकों को स्थानीय विशेषज्ञों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, ग्यिरोंग पोर्ट की घाटी में 45 से 50 फीट तक मलबा और गाद जमा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ का वेग इतना अधिक था कि किसी के जीवित बचने की संभावना बेहद कम है। बताया गया कि पानी और मलबे का मिश्रण करीब 150 फीट तक ऊंचा उठा और उसने पूरे भवन परिसर को पूरी तरह नष्ट कर दिया।

ईशा फाउंडेशन ने कहा कि वे घटनास्थल से किसी सकारात्मक खबर की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अब तक जो भी तथ्य सामने आए हैं, वे स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। संस्था ने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र तक पहुंच सीमित होने के कारण हर जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि करना संभव नहीं है, लेकिन जो सूचनाएं साझा की गई हैं, वे अधिकारियों, मीडिया रिपोर्टों और स्थानीय स्रोतों पर आधारित हैं।

अपने संदेश के अंत में इशा फाउंडेशन ने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक अकल्पनीय त्रासदी है, जिसने पूरे समुदाय को झकझोर दिया है। संस्था ने आश्वासन दिया कि जैसे ही कोई नई और सत्यापित जानकारी मिलेगी, उसे तुरंत साझा किया जाएगा। साथ ही, परिवारों को हर संभव सहायता और सहयोग देने का भरोसा भी दिलाया गया है।

--आईएएनएस

एएमटी/एमएस