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औरैया के चिचोली मेडिकल कॉलेज में इलाज के नाम पर लापरवाही, सफाई कर्मी द्वारा ड्रिप-इंजेक्शन लगाने का वीडियो वायरल

 

उत्तर प्रदेश के औरैया जिले स्थित चिचोली मेडिकल कॉलेज से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में कथित तौर पर एक महिला सफाई कर्मी को लेबर रूम के अंदर महिला मरीज को ड्रिप और इंजेक्शन लगाते हुए देखा जा सकता है। यह वीडियो सामने आने के बाद मरीजों, उनके परिजनों और आम लोगों में गहरी चिंता और नाराजगी देखी जा रही है।

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि लेबर रूम जैसे अति संवेदनशील क्षेत्र में, जहां सिर्फ प्रशिक्षित डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की ही अनुमति होती है, वहां एक सफाई कर्मी इलाज की प्रक्रिया को अंजाम दे रही है। स्वास्थ्य नियमों के अनुसार, प्रसव के दौरान जच्चा और नवजात शिशु दोनों को संक्रमण से बचाने के लिए अत्यंत स्वच्छ वातावरण और प्रशिक्षित चिकित्सा स्टाफ की आवश्यकता होती है। ऐसे में सफाई कर्मी द्वारा ड्रिप और इंजेक्शन लगाना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मरीज की जान के लिए भी बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में अस्पताल में तैनात एक महिला डॉक्टर की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि संबंधित डॉक्टर कथित तौर पर इलाज का काम सफाई कर्मियों से करवा रही थीं। हालांकि, अभी तक अस्पताल प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन वीडियो के वायरल होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।

मरीजों के परिजनों का कहना है कि वे इलाज के लिए अस्पताल पर भरोसा करते हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं उस भरोसे को तोड़ने वाली हैं। एक परिजन ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “अगर सफाई कर्मी ही इलाज करेंगे तो डॉक्टर और नर्सों की जरूरत क्या है?” उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लेबर रूम में संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है। यदि इलाज के दौरान मानकों का पालन न किया जाए तो मां और बच्चे दोनों की जान जोखिम में पड़ सकती है। ऐसे में इस तरह की लापरवाही को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, इंजेक्शन और ड्रिप लगाना एक तकनीकी प्रक्रिया है, जिसके लिए प्रशिक्षण और अनुभव आवश्यक होता है।

सोशल मीडिया पर भी इस वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग सरकारी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा है कि यह मामला सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसकी गहन जांच होनी चाहिए।

फिलहाल, यह मामला जांच का विषय बना हुआ है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल चिकित्सा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा, बल्कि मरीजों की सुरक्षा के साथ खुला खिलवाड़ भी साबित होगा। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस वायरल वीडियो पर क्या कदम उठाता है और दोषियों पर कब तक कार्रवाई होती है।