NEET पेपर लीक: 2024 के सबक से नहीं सीखा सिस्टम, फुटेज में देंखे 2026 में फिर दोहराई गई वही कहानी
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वर्ष 2024 में पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर देशभर में विवाद हुआ था। उस समय राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने दावा किया था कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पूरी व्यवस्था को फुल-प्रूफ बनाया जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञ समिति गठित की गई, सिफारिशें तैयार हुईं और उन्हें लागू करने की बात भी कही गई। लेकिन 2026 में फिर पेपर लीक की घटना सामने आने के बाद पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
2024 में पटना बना था पेपर लीक का केंद्र
5 मई 2024 को आयोजित NEET-UG परीक्षा शुरू होने से पहले ही पेपर लीक की खबरें सामने आने लगी थीं। जांच में बिहार की राजधानी पटना को इस नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बताया गया था। आरोप था कि सॉल्वर गैंग ने परीक्षा से एक रात पहले कुछ अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्न और उनके उत्तर याद करवाए थे।
बाद में जांच एजेंसियों ने कई गिरफ्तारियां कीं और पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। हालांकि विवाद के बावजूद परीक्षा रद्द नहीं की गई और परिणाम जारी किए गए।
सुधार के दावों के बावजूद फिर हुई चूक
2024 के विवाद के बाद NTA और केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कई कदम उठाने का दावा किया। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और गोपनीयता से जुड़े नए प्रोटोकॉल लागू किए गए।इसके बावजूद 2026 में फिर पेपर लीक की घटना सामने आई और इस बार परीक्षा को रद्द करना पड़ा। इससे यह सवाल उठने लगा है कि आखिर दो साल पहले किए गए सुधार कितने प्रभावी साबित हुए।
जमानत पर छूटते आरोपी और कमजोर कार्रवाई पर उठे सवाल
शिक्षा विशेषज्ञों और अभ्यर्थियों का एक वर्ग मानता है कि 2024 के मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई अपेक्षित सख्ती से नहीं हुई। कई आरोपी समय के साथ जमानत पर बाहर आते गए, जबकि जांच और मुकदमेबाजी की प्रक्रिया लंबी चलती रही।आलोचकों का कहना है कि जब पेपर लीक जैसे संगठित अपराध में शामिल लोगों को त्वरित और कड़ी सजा नहीं मिलती, तो ऐसे गिरोहों का मनोबल बढ़ता है और वे नए तरीकों से सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश करते हैं।
लाखों छात्रों के भविष्य पर असर
NEET-UG देशभर के लाखों छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा का प्रवेश द्वार है। ऐसे में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि मेहनत करने वाले छात्रों के मन में भी असुरक्षा और अविश्वास पैदा करती हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नई गाइडलाइन और समितियां बनाना पर्याप्त नहीं है। परीक्षा सुरक्षा से जुड़े मामलों में त्वरित जांच, दोषियों को कड़ी सजा और तकनीकी निगरानी को और मजबूत बनाना जरूरी है।
अब जवाबदेही तय करने की मांग
2026 में दोबारा पेपर लीक की घटना सामने आने के बाद विपक्षी दलों, छात्रों और शिक्षा विशेषज्ञों ने जवाबदेही तय करने की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि यदि 2024 की घटनाओं से सबक लिया गया होता और दोषियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई होती, तो शायद आज फिर करोड़ों छात्रों को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।NEET पेपर लीक का यह नया विवाद एक बार फिर देश की परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा गया है।