नाटो से निकलने पर विचार कर रहे हैं ट्रंप, चर्चा को गठबंधन के महासचिव मार्क रूटे से की मुलाकात
वॉशिंगटन, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान के साथ संघर्ष के बीच नाटो और अमेरिका के बीच मतभेद बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। ईरान के खिलाफ अमेरिकी सरकार की कार्रवाई से नाटो देश बेहद नाराज नजर आ रहे हैं। ऐसे में नाटो की प्रतिक्रिया को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो के महासचिव मार्क रूटे से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान ट्रंप ने अमेरिका के नाटो से पीछे हटने की संभावना पर चर्चा की।
व्हाइट हाउस ने प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने प्रेसिडेंट के हवाले से कहा कि ट्रंप नाटो से हटने पर विचार कर रहे हैं, गठबंधन कमजोर पड़ गया है।
उन्होंने व्हाइट हाउस की एक न्यूज कॉन्फ्रेंस में रिपोर्टर्स से कहा, "उनका परीक्षा लिया गया, जिसमें वो फेल हो गए।"
लेविट ने आगे कहा, "नाटो छोड़ने को लेकर राष्ट्रपति ने चर्चा की है और मुझे लगता है कि इस पर आगे और बातचीत होगी।"
यह मीटिंग ऐसे समय में हुई जब ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना की कार्रवाई का पूरी तरह से समर्थन न करने को लेकर ट्रंप यूरोपीय सहयोगियों से नाराज हैं। बातचीत में बड़े स्तर पर सहयोग को लेकर भी बात हुई, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग रूट को सुरक्षित करने की कोशिशें और रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए डिप्लोमैटिक कदम शामिल थे।
एक अलग बातचीत में, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने रूटे से मुलाकात की और नाटो सहयोगियों के साथ सहयोग बढ़ाने और बोझ को शिफ्ट करने पर चर्चा की।
रिपब्लिकन कांग्रेस के नेताओं ने गठबंधन की लगातार अहमियत पर जोर दिया। सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन रोजर विकर और हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन माइक रोजर्स ने एक संयुक्त बयान में कहा, “एक मजबूत नाटो अमेरिका के हित में है।”
उन्होंने कहा कि हाल के अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन को हमारे ज्यादातर नाटो सहयोगियों के अहम समर्थन से काफी फायदा हुआ है। ट्रंप की बातों ने यूरोप में इस गठबंधन के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
व्हाइट हाउस ने बाद में कहा कि ट्रंप और रूटे के बीच मीटिंग खत्म हुई और नीति में किसी भी बदलाव की कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई।
नाटो की स्थापना 1949 में हुई थी और तब से आज तक पश्चिमी देशों की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का मुख्य आधार बना हुआ है। इसका पारस्परिक रक्षा प्रावधान (म्यूचुअल डिफेंस क्लॉज) सदस्य देशों को इस बात के लिए बाध्य करता है कि किसी एक पर हमला होने की स्थिति में वे एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आएं।
--आईएएनएस
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