नंदीग्राम उपचुनाव: कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत, फुटेज में देंखे गिरफ्तारी पर रोक
पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनाव से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को बड़ी राहत दी है। गुरुवार को अदालत ने उन्हें जमानत दे दी और पुलिस को मामले में उनकी गिरफ्तारी करने से रोक दिया। कोर्ट ने मिलन प्रधान को उपचुनाव लड़ने की भी अनुमति दे दी है।मामले की सुनवाई कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की अदालत में हुई। जमानत देते हुए कोर्ट ने मामले की जांच और कार्रवाई के समय को लेकर सवाल उठाए। अदालत ने टिप्पणी की कि यह हैरान करने वाली बात है कि संबंधित शिकायत वर्ष 2007 में दर्ज की गई थी, लेकिन जांच अधिकारी ने करीब 19 साल बाद मिलन प्रधान के खिलाफ कार्रवाई की।
19 साल बाद कार्रवाई पर कोर्ट ने उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि शिकायत दर्ज होने और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के बीच इतना लंबा अंतराल अपने आप में महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है। अदालत ने राज्य सरकार से मामले में कार्रवाई के आधार से जुड़े दस्तावेज पेश करने को कहा।कोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इतने लंबे समय बाद मिलन प्रधान के खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई और जांच अधिकारी ने इस समय कार्रवाई करने का फैसला किस आधार पर लिया।
चुनाव लड़ने का रास्ता साफ
हाईकोर्ट के आदेश के बाद मिलन प्रधान के लिए नंदीग्राम उपचुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति दी है और पुलिस को मामले में गिरफ्तार नहीं करने का निर्देश दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। नंदीग्राम सीट राज्य की राजनीति में पहले भी काफी महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार को अदालत से मिली राहत का चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, हाईकोर्ट का यह आदेश मिलन प्रधान के खिलाफ दर्ज पुराने मामले में आरोपों के अंतिम रूप से सही या गलत होने का फैसला नहीं है। अदालत ने फिलहाल गिरफ्तारी से राहत और चुनाव लड़ने की अनुमति से जुड़े मुद्दे पर आदेश दिया है। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।