×

नालंदा विश्वविद्यालय और सीएसआईआर के बीच एमओयू, विज्ञान आधारित सतत विकास व ग्रामीण परिवर्तन को मिलेगा बढ़ावा

 

राजगीर, 22 जुलाई (आईएएनएस)। बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के बीच बुधवार को नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर मुख्यालय (अनुसंधान भवन) में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य विज्ञान आधारित सतत विकास, प्रौद्योगिकी प्रसार, ग्रामीण परिवर्तन, कौशल विकास तथा वैज्ञानिक जनसंपर्क को नई दिशा देना है।

इसके माध्यम से सीएसआईआर की स्वदेशी वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपलब्धियों को नालंदा विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक वातावरण से जोड़ते हुए समाज-केंद्रित विकास मॉडल विकसित किए जाएंगे। समझौते का आदान-प्रदान नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी, सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी तथा विदेश मंत्रालय के सचिव (ईस्ट) रुद्रेन्द्र टंडन की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और संकाय सदस्य भी मौजूद रहे।

कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि नई प्रौद्योगिकियों का विकास जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी उन्हें समाज की वास्तविक आवश्यकताओं तक पहुंचाना भी है। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर के साथ यह साझेदारी नालंदा क्षेत्र में आदर्श ग्राम विकास, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जल गुणवत्ता सुधार और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में तकनीकी समाधान लागू करने के साथ स्थानीय समुदायों के साथ विश्वविद्यालय की सहभागिता को भी मजबूत करेगी।

विदेश मंत्रालय के सचिव (ईस्ट) रुद्रेन्द्र टंडन ने कहा कि प्रधानमंत्री की परिकल्पना के अनुरूप नालंदा विश्वविद्यालय को एक विश्वस्तरीय अंतरराष्ट्रीय संस्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर जैसे देश के अग्रणी वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान के साथ यह सहयोग विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आसपास के समुदायों के लिए नए अवसर उपलब्ध कराएगा।

सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने इस समझौते को दोनों संस्थानों की साझेदारी में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय का बहुराष्ट्रीय छात्र समुदाय भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों और स्वदेशी तकनीकों को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, मृदा सुधार, जल गुणवत्ता सुधार और अन्य सामाजिक उपयोगिता से जुड़ी मिशन आधारित तकनीकों को विश्वविद्यालय परिसर और आसपास के गांवों में लागू करने का प्रस्ताव भी रखा।

समझौते के तहत नालंदा विश्वविद्यालय परिसर में सीएसआईआर टेक्नोलॉजी गैलरी की स्थापना की जाएगी, जहां सीएसआईआर की विभिन्न प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित स्वदेशी तकनीकों, वैज्ञानिक नवाचारों और प्रायोगिक मॉडलों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा कृषि अवशेष एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, कौशल विकास, ग्रामीण आजीविका संवर्धन, पुष्पोत्पादन, औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती, कृषि प्रसंस्करण और ग्रामीण उद्यमिता से जुड़े कार्यक्रम भी राजगीर क्षेत्र के गांवों में संचालित किए जाएंगे।

दोनों संस्थानों का मानना है कि यह साझेदारी विज्ञान और समाज के बीच मजबूत सेतु बनाते हुए स्थानीय विकास के साथ भारतीय वैज्ञानिक नवाचारों को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।

--आईएएनएस

एमएनपी/डीकेपी