नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 संपन्न, 9 दिनों में आए दो मिलियन लोग
नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 रविवार को उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। यहां मेले में आखिरी दिन भी पुस्तक प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी। बड़ी संख्या में हर आयु वर्ग के पुस्तक प्रेमी यहां पहुंचे। लोगों ने अपनी पसंदीदा पुस्तकें खरीदीं और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हिस्सा भी बने। यहां बीते नौ दिनों में लगभग दो मिलियन लोग इस नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में शामिल हुए। पुस्तक मेले में 50 से अधिक देशों की भागीदारी रही।
कतर अतिथि सम्मान देश रहा और स्पेन फोकस देश के रूप में उपस्थित रहा। इससे अंतर-सांस्कृतिक सहभागिता को भी बल मिला। मेले में लगभग 3,000 स्टॉल लगाए गए, जिनमें भारत और विदेश के एक हजार से अधिक प्रकाशकों की भागीदारी रही। मेले में 30 से अधिक भाषाओं की पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया, जिनमें हिंदी, अंग्रेजी, और संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त भारतीय भाषाएं शामिल रहीं। भौतिक प्रदर्शनी के साथ राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय पहल के तहत 23 से अधिक भाषाओं में 6,000 से अधिक ई-बुक उपलब्ध कराई गईं, जिससे साहित्य तक पहुंच को विस्तार मिला।
अंतरराष्ट्रीय पवेलियन में अरबी, स्पेनिश, रूसी, फ्रेंच और जापानी जैसी भाषाओं की पुस्तकों का भी प्रदर्शन किया गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) ने इस पुस्तक मेले का आयोजन किया था।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक युवराज मलिक ने रविवार को बताया कि यहां नौ दिनों में लगभग दो मिलियन लोगों की उपस्थिति दर्ज हुई। उन्होंने कहा कि यह गर्व का विषय है कि मेला लोगों को पुस्तकों, साहित्य, कला, संस्कृति और रचनात्मक वातावरण के करीब लाने में सफल रहा। पुस्तकों की खरीद यह संकेत देती है कि पढ़ने की संस्कृति फिर से सशक्त हो रही है। रविवार को अंतिम दिन मेले का प्रवेश शुरू होते ही सभी हॉलों में चहल-पहल दिखाई दी। परिवार, छात्र, युवा पाठक और वरिष्ठ नागरिक स्टॉलों के बीच घूमते नजर आए, और प्रकाशकों और पुस्तक प्रेमियों ने आखिरी दिन विक्रेताओं द्वारा दी जा रही भारी छूट का लाभ भी उठाया।
प्रकाशकों ने अंतिम दिन बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि की जानकारी दी और इसका श्रेय आकर्षक छूट तथा सप्ताहांत के उत्सवपूर्ण माहौल को दिया। पुस्तक मेले में शामिल एक प्रकाशक ने बताया कि अंतिम दिन बिक्री अचानक बढ़ गई और उनका अधिकांश स्टॉक बिक चुका है। युवा पाठकों का उत्साह यह दर्शाता है कि पुस्तक पढ़ने की आदत आज भी जीवित है। आगंतुकों ने भी इसी तरह की भावना व्यक्त की।
वहीं, एक पुस्तक प्रेमी सलोनी ने कहा, “मैंने विशेष रूप से अंतिम दिन मेले में आने का निर्णय लिया। मैं यह अवसर चूकना नहीं चाहती थी। मैंने पसंदीदा पुस्तकों की खरीद के साथ यहां कवि सम्मेलन का आनंद लिया और बाल मंडप में बच्चों के लिए आयोजित गतिविधियों को देखा। यह एक शानदार आयोजन रहा और यहां से कई यादें साथ ले जा रही हूं।”
समापन दिवस पर नितिन सेठ, सह-संस्थापक और सीईओ, इंसेडो इंक द्वारा लिखित पुस्तक ‘द ह्यूमन एज इन एन एआई ड्रिवन साइबर वर्ल्ड’ का विमोचन हुआ। नितिन सेठ ने बताया कि एआई केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि मानव यात्रा का एक महत्वपूर्ण विकास है। कुछ लोग मानते हैं कि एआई मानवता का अंतिम बड़ा आविष्कार हो सकता है, पर वह भविष्य को लेकर आशावादी हैं।
उन्होंने कहा कि एआई ने नौकरियों पर असर डाला है, पर इसे ऐसे परिवर्तन के रूप में देखना चाहिए जो उद्यमिता के नए अवसर खोल रहा है और इसे अवसर के रूप में अपनाया जाना चाहिए। वहीं यहां रविवार को बाल कहानियों का लोकार्पण किया गया। इस पहल का एक उद्देश्य बच्चों में व्यक्तित्व निर्माण एवं नैतिक मूल्यों के साथ अपनी साहित्यिक सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरुकता लाना भी है। इस श्रृंखला के अंतर्गत प्रारंभिक चरण में सात पुस्तकें प्रकाशित की गई हैं।
पहले सेट में प्रेमचंद की कहानी मिट्ठू, आचार्य शिवपूजन सहाय की कुंजी, भीष्म साहनी की कहानी चमगादड़ का रस और दो गौरैया, सुदर्शन की साईकिल की सवारी, अमरकांत की बहादुर और विष्णु प्रभाकर की कहानी सबसे सुंदर लड़की शामिल हैं। एनबीटी इंडिया के बाल पुस्तकालय को समृद्ध करने वाली 6 और द्विभाषी पुस्तकों का भी थीम पवेलियन में लोकार्पण किया गया।
दोनों भाषाओं में तैयार इन पुस्तकों का उद्देश्य हर बच्चे को उसकी अपनी भाषा में पठन सामग्री उपलब्ध करवाना है। इसमें भारत के मधुर रंग, पानी ही पानी, पूंछ, मददगार हाथ, क्या करें रावण का, अचंभा अष्टभुजा, और आजाद करो शामिल हैं। इन सभी पुस्तकों को प्रीस्कूल से लेकर 8 वर्ष तक के बच्चों के लिए तैयार किया गया है। विद्या और छोटा भीम-बिग ग्रीन मिशन का शुभारंभ भी किया गया। इस सशक्त आधार पर आगे बढ़ते हुए सामग्री को कॉमिक प्रारूप में पुनर्कल्पित किया है, ताकि यह नन्हें पाठकों के लिए अधिक सुलभ और रोचक बन सके।
--आईएएनएस
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