नई दिल्ली में टीएमसी कार्यालय पर पसरा सन्नाटा, भाजपा लगातार बना रही बढ़त
नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में मतगणना के बीच राजधानी नई दिल्ली स्थित तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यालय के बाहर असामान्य सन्नाटा देखने को मिल रहा है। आमतौर पर चुनाव परिणामों के दिन जहां पार्टी कार्यालयों में कार्यकर्ताओं और नेताओं की भारी भीड़ उमड़ती है, वहीं इस बार टीएमसी के दफ्तर के बाहर सोमवार सुबह से ही कोई खास हलचल नजर नहीं आई।
सोमवार सुबह के समय, जब देशभर में चुनावी नतीजों को लेकर उत्सुकता चरम पर होती है, टीएमसी कार्यालय के बाहर न तो समर्थकों की भीड़ दिखी और न ही पार्टी के वरिष्ठ नेता वहां पहुंचे। यह स्थिति उस समय और भी ध्यान खींचने वाली बन गई, जब पश्चिम बंगाल में चल रही मतगणना के शुरुआती रुझानों में टीएमसी अपेक्षा से पीछे चलती दिखाई दी।
देखा जाए तो शुरुआती रुझानों का सीधा असर पार्टी के मनोबल पर पड़ा है, जिसका प्रतिबिंब दिल्ली स्थित कार्यालय में साफ देखा जा सकता है। आमतौर पर ऐसे मौकों पर ढोल-नगाड़ों और जश्न की तैयारियां देखने को मिलती हैं, लेकिन इस बार माहौल पूरी तरह शांत और गंभीर बना हुआ है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कई कार्यकर्ता और पदाधिकारी फिलहाल टीवी और डिजिटल माध्यमों के जरिए मतगणना के रुझानों पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि, जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ेगा और नतीजे स्पष्ट होंगे, स्थिति में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
टीएमसी के लिए यह चुनाव काफी अहम माना जा रहा है, और पार्टी को अपने गढ़ में मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद थी। लेकिन शुरुआती रुझानों ने पार्टी के भीतर चिंतन का माहौल बना दिया है। दिल्ली कार्यालय की खामोशी इस बात का संकेत दे रही है कि पार्टी फिलहाल परिणामों को लेकर सतर्क और संयमित रुख अपना रही है।
वहीं पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के रुझानों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। 293 सीटों पर जारी गिनती के बीच ऐसे चार जिले सामने आए हैं, जहां तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का खाता तक नहीं खुलता दिख रहा है। जिन चार जिलों में टीएमसी का खाता तक खुलता नहीं दिख रहे हैं, उसमें उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी जबकि दक्षिण बंगाल के झारग्राम और पश्चिम बर्धमान शामिल हैं।
झारग्राम इलाका आदिवासी बहुल जंगलमहल क्षेत्र का हिस्सा है, जो कभी माकपा का गढ़ रहा, लेकिन 2011 के बाद यह तृणमूल कांग्रेस का मजबूत आधार बन गया था। लेफ्ट फ्रंट के अंतिम वर्षों में यह इलाका माओवादी गतिविधियों के लिए भी जाना जाता था।
--आईएएनएस
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