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चंबल किनारे रहस्यमयी कुंड

 

चंबल मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से होकर बहने वाली प्रमुख नदी है। इसका प्राचीन नाम ‘चर्मण्वती’ बताया जाता है और महाभारत में भी इसका उल्लेख इसी नाम से मिलता है।एक प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, राजा रंतिदेव ने चर्मण्वती के किनारे यज्ञ कराया था। इस यज्ञ में बड़ी संख्या में पशुओं की बलि दी गई। मान्यता है कि बलि से निकले रक्त के कारण नदी का संबंध ‘चर्म’ यानी पशुओं की खाल से जुड़ा और इसे चर्मण्वती कहा जाने लगा।

द्रौपदी के श्राप की कहानी

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चंबल से जुड़ी दूसरी प्रसिद्ध लोकमान्यता महाभारत और द्रौपदी से संबंधित है। कथा के अनुसार, चौसर के खेल और द्रौपदी के अपमान की घटना के बाद द्रौपदी ने चंबल नदी को श्राप दिया था। इसी वजह से लोकविश्वास में चंबल को ‘श्रापित नदी’ कहा जाने लगा और इसकी पूजा न करने की परंपरा की बात कही जाती है।हालांकि, इसे ऐतिहासिक या वैज्ञानिक तथ्य के बजाय धार्मिक/लोककथा के रूप में समझना चाहिए। चंबल नदी के वास्तविक भूगोल, जल प्रवाह और पर्यावरण का इससे अलग वैज्ञानिक आधार है।

फिर चंबल डकैतों के लिए क्यों मशहूर हुई?

चंबल घाटी के गहरे बीहड़ और दुर्गम भू-भाग लंबे समय तक अपराधियों और दस्यु गिरोहों के लिए छिपने का प्राकृतिक ठिकाना बने। यही कारण है कि चंबल का नाम मोहर सिंह, मलखान सिंह, फूलन देवी और पान सिंह तोमर जैसे चर्चित दस्यु चरित्रों से जुड़ गया। लेकिन चंबल की एक दूसरी पहचान भी है। यह नदी भारत की अपेक्षाकृत स्वच्छ और जैव-विविधता से समृद्ध नदियों में गिनी जाती है। इसके आसपास का क्षेत्र घड़ियाल, मगरमच्छ और कई अन्य वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण आवास है।

चंबल घाटी परियोजना

चंबल केवल ऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है। 1954 में चंबल घाटी परियोजना शुरू की गई, जिसके तहत नदी पर गांधी सागर, राणा प्रताप सागर और जवाहर सागर बांध बनाए गए। इसके अलावा कोटा बैराज के माध्यम से राजस्थान और मध्य प्रदेश में सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया जाता है।