मुंबई पुलिस ने CJP के शिवाजी पार्क प्रदर्शन को नहीं दी अनुमति, वीडियो में जाने आयोजकों ने दी जेल भरो आंदोलन की चेतावनी
मुंबई पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति देने से इनकार कर दिया है। यह प्रदर्शन चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया जाना था। पुलिस ने अनुमति नहीं देने के पीछे कई कारणों का हवाला दिया है, जिसमें हाईकोर्ट के निर्देश, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की अनुमति का अभाव और ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका शामिल है।
पुलिस के अनुसार शिवाजी पार्क क्षेत्र साइलेंस जोन में आता है और इसके आसपास बड़ी संख्या में रिहायशी इलाके मौजूद हैं। ऐसे में बड़े स्तर पर प्रदर्शन होने से स्थानीय लोगों को परेशानी हो सकती है। पुलिस ने आशंका जताई कि प्रदर्शन के कारण इलाके में ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है और आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।मुंबई पुलिस ने कहा कि शिवाजी पार्क के आसपास अस्पताल भी मौजूद हैं, जहां मरीजों और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही लगातार जारी रहती है। प्रदर्शन के दौरान भीड़ बढ़ने से एंबुलेंस और अन्य जरूरी सेवाओं को परेशानी होने की संभावना है। इन्हीं कारणों को देखते हुए पुलिस ने आयोजकों को मुंबई में किसी अन्य स्थान पर प्रदर्शन आयोजित करने का विकल्प तलाशने की सलाह दी है।
आयोजकों ने जताई नाराजगी
वहीं, CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने पुलिस के फैसले पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की आवाज को दबाने की कोशिशें स्वीकार नहीं की जा सकतीं। दीपके ने दावा किया कि यदि संगठन को प्रदर्शन करने के अधिकार से वंचित किया गया तो CJP गांधी जयंती के दिन मुंबई में जेल भरो आंदोलन शुरू करेगी।उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है और इस अधिकार को रोका नहीं जाना चाहिए। संगठन का कहना है कि वह अपने मुद्दों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराना चाहता है।
चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन की थी तैयारी
CJP ने 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। हालांकि, पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बाद अब आयोजकों के सामने प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशने की स्थिति बन गई है।फिलहाल पुलिस और आयोजकों के बीच इस मुद्दे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। पुलिस ने जहां कानून व्यवस्था, यातायात और स्थानीय परिस्थितियों का हवाला दिया है, वहीं संगठन ने इसे नागरिक अधिकारों से जुड़ा मामला बताया है।