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मुंबई: नेपाल बाढ़ में लापता दंपति के परिजनों की सरकार से गुहार, बोले- तेज हो रेस्क्यू ऑपरेशन

 

मुंबई, 29 अगस्त (आईएएनएस)। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए मुंबई के दंपति के लापता होने से उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है। संजय पाटनकर ने अपने बड़े भाई सतीश पाटनकर और भाभी रेखा पाटनकर की तलाश के लिए भारत और नेपाल सरकार से बचाव अभियान तेज करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हादसा जिस इलाके में हुआ है, उसे देखते हुए व्यापक स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाने और उसकी जानकारी सार्वजनिक करने की जरूरत है।

संजय पाटनकर ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि सतीश और रेखा 23 अगस्त को मुंबई से काठमांडू पहुंचे थे। दोनों कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए एक ट्रैवल ग्रुप के साथ गए थे। 24 अगस्त को काठमांडू में एक्लीमेटाइजेशन और स्थानीय भ्रमण के बाद 25 अगस्त को उनका दल तिमुर की ओर रवाना हुआ। तिमुर नेपाल-तिब्बत सीमा के नजदीक स्थित है। वहां पहुंचने के बाद परिवार को व्हाट्सऐप संदेश मिला था कि वे तिमुर पहुंच गए हैं और अगले दिन सीमा पार करने की तैयारी है।

संजय ने बताया कि यात्रा दल में करीब 27 लोग थे। 26 अगस्त की सुबह सभी लोग इमीग्रेशन प्रक्रिया के लिए आगे बढ़े। दल के कुछ सदस्यों ने सुबह करीब 8:27 बजे अपने परिजनों से संपर्क किया था। इसके कुछ ही समय बाद जिस इलाके में इमीग्रेशन सेंटर और फ्रेंडशिप ब्रिज स्थित है, वहां अचानक फ्लैश फ्लड की घटना हुई। बाद में सामने आया कि यह क्षेत्र बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल था।

उन्होंने बताया कि शुरुआत में परिवार को हादसे की जानकारी नहीं थी। दोपहर में नेपाल में फ्लैश फ्लड की खबर सामने आने के बाद उन्होंने तिमुर का नाम देखा और स्थिति की गंभीरता समझी। इसके बाद उन्होंने ट्रैवल कंपनी से संपर्क किया, लेकिन जमीनी स्तर पर संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण वहां से भी तत्काल कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी।

उन्होंने बताया कि ट्रैवल ग्रुप के संचालक भी दल के साथ यात्रा कर रहे थे। कंपनी की ओर से भी काठमांडू पहुंचकर स्थिति की जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया। परिवार और अन्य यात्रियों के परिजनों ने अलग-अलग स्थानीय समूह बनाकर फोटो, वीडियो और संभावित सुराग जुटाने शुरू किए, लेकिन हादसे के बाद रात करीब 8:30 बजे से किसी भी यात्री का परिवार से संपर्क नहीं हो पाया।

संजय ने कहा कि सरकार की ओर से मिसिंग पर्सन्स के लिए पोर्टल उपलब्ध कराया गया है और उन्होंने अपने परिजनों की जानकारी वहां दर्ज कराई है। हालांकि, उनका कहना है कि परिवारों को अब तक पर्याप्त और नियमित अपडेट नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल में फंसे यात्रियों को वापस लाना जरूरी है, लेकिन उन लोगों की तलाश भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जो बाढ़ और मलबे के बीच फंसे हो सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी दूरी तक नदी के बहाव वाले क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन कितना हुआ है और कितना इलाका अभी बाकी है, इसकी स्पष्ट जानकारी परिजनों को मिलनी चाहिए।

संजय ने कहा कि हादसे का असर संभवतः घटनास्थल से काफी दूर तक हुआ है और मलबे या पानी के साथ शवों के बहकर भारत तक पहुंचने की भी खबरें सामने आई हैं। ऐसे में नेपाल, चीन और भारत को समन्वय के साथ बड़े स्तर पर खोज अभियान चलाना चाहिए। उन्होंने भारत सरकार से नेपाल और चीन के साथ मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन में सहयोग बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि किसी औपचारिक अनुरोध की आवश्यकता है तो ऐसी प्रक्रिया जल्द पूरी होनी चाहिए, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक इस क्षेत्र में मौजूद थे।

उन्होंने आपदा प्रबंधन की तैयारियों में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। संजय ने सुझाव दिया कि कठिन और जोखिमपूर्ण धार्मिक यात्राओं के लिए यात्रियों की पहचान, संपर्क विवरण और अन्य जरूरी जानकारी एक मानकीकृत सिस्टम में पहले से उपलब्ध होनी चाहिए। इससे किसी आपदा की स्थिति में लापता लोगों की पहचान और तलाश में तेजी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि बाढ़ और कीचड़ जैसी आपदा में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। भूकंप में मलबे के नीचे लोग लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं, लेकिन पानी और कीचड़ में फंसे लोगों के लिए बचाव की समय-सीमा बेहद कम हो सकती है। इसलिए रेस्क्यू टीमों को जल्द से जल्द प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना चाहिए।

संजय ने बताया कि सतीश और रेखा के दो बच्चे हैं, जो अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में रहते हैं। परिवार लगातार संपर्क में है और मुश्किल परिस्थिति का संयम के साथ सामना कर रहा है। परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि दोनों के बारे में जल्द कोई ठोस जानकारी मिले। नेपाल सरकार की ओर से रेस्क्यू और लापता लोगों की जानकारी उपलब्ध कराने के प्रयासों को संजय ने स्वीकार किया, लेकिन उन्होंने कहा कि आपदा का पैमाना बहुत बड़ा है और उपलब्ध संसाधनों को बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने नेपाल सरकार से अपील की कि चीन और भारत से अधिक संसाधन और विशेषज्ञ सहायता लेकर प्रभावित क्षेत्र का व्यापक सर्वे कराया जाए, ताकि पता चल सके कि कोई व्यक्ति जीवित अवस्था में कहीं फंसा है या नहीं। संजय ने कहा कि इस समय परिवारों को सबसे ज्यादा जरूरत तेजी, पारदर्शिता और सही जानकारी की है।

--आईएएनएस

पीएसके