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सीएम सुक्खू ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से की मुलाकात, हिमाचल के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग

 

नई दिल्ली, 8 सितंबर (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण से भेंट की। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से राज्य के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करने का आग्रह किया और हिमाचल की मौजूदा वित्तीय स्थिति व चुनौतियों से अवगत कराया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 से राजस्व घाटा अनुदान बंद हो जाने के कारण हिमाचल प्रदेश को लगभग 8,000 करोड़ रुपए के सालाना वित्तीय अंतर का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में राजस्व घाटा अनुदान में लगातार कटौती से राज्य के वित्त पर भारी दबाव बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल एक पहाड़ी राज्य है, जहां कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अधिक संवेदनशीलता और बुनियादी ढांचे के निर्माण व रख-रखाव की ज्यादा लागत के कारण सार्वजनिक सेवाओं का संचालन तुलनात्मक रूप से काफी महंगा है।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य सरकार वित्तीय सुधारों और राजस्व बढ़ाने के उपायों के जरिए अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, लेकिन हाल के वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं से हुए भारी नुकसान को देखते हुए केंद्र से अतिरिक्त मदद बेहद जरूरी हो गई है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। उन्होंने पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) के तहत आपूर्ति एवं विक्रेता भुगतानों को एसएनए-स्पर्श मॉडल से छूट देने का आग्रह किया।

इसके साथ ही उन्होंने हिमाचल प्रदेश के लिए बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं के आवंटन में बढ़ोतरी और राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों व अधिक लागत को देखते हुए इस घटक के तहत सहायता को दोगुना करने पर विचार करने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने राज्य की उधार लेने की सीमा को मौजूदा 3 प्रतिशत से बढ़ाकर सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 4 प्रतिशत करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त वित्तीय गुंजाइश मिलने से राज्य को अपनी प्रतिबद्ध देनदारियों को पूरा करने के साथ-साथ जरूरी सार्वजनिक सेवाओं और विकास कार्यों के लिए संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि हिमाचल की वित्तीय चुनौतियों का आकलन राज्य की विशेष भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों के संदर्भ में किया जाए और राज्य हित में उदार वित्तीय सहायता और जरूरी स्वीकृतियां प्रदान की जाएं।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे सुधारों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिमाचल देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रदान किया है। इस पहल का मकसद किसानों को लाभकारी मूल्य देना, ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाना और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रही है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि हिमाचल सरकार की मांगों पर राज्य की वित्तीय जरूरतों और विकासात्मक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। उन्होंने राज्य के सामने मौजूद वित्तीय चुनौतियों को स्वीकार करते हुए कहा कि केंद्र सरकार राज्य की जायज वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी सहयोग प्रदान करेगी।

उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि हिमाचल के लिए विशेष केंद्रीय सहायता के तहत अतिरिक्त वित्तीय मदद पर विचार किया जाएगा, ताकि राज्य अपनी विकास जरूरतों को पूरा कर सके और वित्तीय स्थिति को मजबूत बना सके।

इस बैठक में हिमाचल के मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, प्रधान आवासीय आयुक्त अजय कुमार और केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

--आईएएनएस

एससीएच