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चलती बस, मासूम की चीख और सोता हुआ प्रशासन! जानिए 43 KM की उस 'क्रिमिनल राइड' का सच

 

उत्तर प्रदेश के नोएडा और दिल्ली के बीच चलने वाली एक बस में नाबालिग छात्रा के साथ गैंगरेप की घटना ने पुलिस चेकिंग और सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हैरानी की बात यह है कि वारदात के दौरान बस करीब 43 किलोमीटर का सफर तय करती रही, लेकिन रास्ते में उसे रोककर जांच किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई.

यह घटना 2012 के निर्भया कांड के वर्षों बाद सामने आई है. निर्भया मामले के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक और निजी बसों के संचालन में कई नियम लागू किए गए थे. इसके बावजूद जिस बस में यह वारदात हुई, उसकी खिड़कियों पर ऐसे पर्दे लगे हुए थे, जिनकी वजह से बाहर से बस के अंदर की गतिविधियां दिखाई नहीं देती थीं.

बारिश में बस में बैठी नाबालिग, ड्राइवर-कंडक्टर ने बदल दिया रास्ता

जानकारी के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा के परी चौक से एक नाबालिग छात्रा को नोएडा सेक्टर-63 जाना था. उस समय बारिश हो रही थी और उसे कोई दूसरा साधन नहीं मिल रहा था.

इसी दौरान बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने उसे सेक्टर-63 तक छोड़ने की बात कहकर बस में बैठा लिया. आरोप है कि सेक्टर-63 जाने के बजाय बस को दिल्ली के कश्मीरी गेट की तरफ मोड़ दिया गया.

इसके बाद करीब 43 किलोमीटर तक बस चलती रही और इसी दौरान नाबालिग के साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया गया.

43 किलोमीटर के रास्ते में क्या मिला?

घटना के बाद इस पूरे रूट पर सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल की गई. सफर की शुरुआत ग्रेटर नोएडा के परी चौक से हुई.

परी चौक पर उस जगह से कुछ ही दूरी पर एक पुलिस बूथ, PCR वैन और बैरिकेडिंग मौजूद थी, जहां से छात्रा बस में सवार हुई थी.

इसके बाद रास्ता दिल्ली-नोएडा बॉर्डर की ओर जाता है. मयूर विहार के पास बैरिकेडिंग तो दिखाई दी, लेकिन दिन में की गई पड़ताल के दौरान वहां कोई पुलिसकर्मी नजर नहीं आया.

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह जांच दिन के समय की गई थी. इसलिए उस वक्त पुलिसकर्मी की मौजूदगी न होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि घटना वाली रात भी वहां पुलिस तैनात नहीं थी.

व्यस्त चौराहे पर CCTV को लेकर भी सवाल

मयूर विहार के पास दिल्ली-नोएडा इंटरसेक्शन इस रूट के व्यस्त हिस्सों में से एक है. यहां भी बैरिकेडिंग दिखाई दी, लेकिन ट्रैफिक सिग्नल पर CCTV कैमरों की व्यवस्था को लेकर सवाल सामने आए.

इतने व्यस्त चौराहे पर निगरानी व्यवस्था में कमी सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े करती है. खासकर तब, जब यह रूट दिल्ली और नोएडा के बीच बड़ी संख्या में यात्रियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है.

कश्मीरी गेट पर भी नहीं दिखा कोई चेकिंग पॉइंट

43 किलोमीटर का सफर पूरा करने के बाद बस कश्मीरी गेट पहुंची, जहां नाबालिग को उतारा गया था.

पड़ताल के दौरान यहां कोई स्पष्ट बैरिकेडिंग या चेकिंग पॉइंट नजर नहीं आया. इससे बसों की नियमित जांच और रात के समय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं.

बस की खिड़कियों पर लगे थे गहरे पीले पर्दे

जिस बस में घटना हुई, उसकी खिड़कियों पर गहरे पीले रंग के पर्दे लगे हुए थे. इन पर्दों की वजह से बाहर से बस के अंदर देखना मुश्किल था.

निर्भया कांड के बाद सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर नियमों को सख्त किया गया था. बसों में ऐसे पर्दों या फिल्मों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे, जिनसे अंदर की गतिविधियां बाहर से दिखाई न दें.

ऐसे में सवाल यह है कि नियमों का उल्लंघन करने वाली बस सड़क पर कैसे चलती रही और रास्ते में उसकी जांच क्यों नहीं हुई?

23 दिनों में 9 चालान, फिर भी बस पर कार्रवाई क्यों नहीं?

मामले की जांच के दौरान बस के ट्रैफिक रिकॉर्ड को लेकर भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. रिकॉर्ड के मुताबिक, ड्राइवर कुलदीप के खिलाफ घटना से पहले महज 23 दिनों के भीतर 9 चालान काटे गए थे.

इनमें से कई चालान ओवरस्पीडिंग से जुड़े बताए जा रहे हैं. आरोप है कि ड्राइवर तेज रफ्तार से बस चलाने के अलावा बिना इंडिकेटर लेन बदलने जैसे यातायात नियमों का उल्लंघन भी करता था.

करीब 11 चालान का रिकॉर्ड

बस का रजिस्ट्रेशन 28 अप्रैल 2026 को फिरोजाबाद RTO कार्यालय में हुआ था. ऑनलाइन ट्रैफिक रिकॉर्ड की पड़ताल में करीब 11 बार ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन से जुड़े चालान सामने आए हैं.

इनमें तेज गति से वाहन चलाने और खतरनाक तरीके से लेन बदलने जैसे उल्लंघन शामिल बताए जा रहे हैं. यमुना एक्सप्रेसवे और नोएडा सेक्टर-168 जैसे व्यस्त मार्गों पर भी बस के खिलाफ ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के रिकॉर्ड सामने आए हैं.

जुलाई में ही 56 हजार रुपये के चालान

रिकॉर्ड के अनुसार, अकेले जुलाई में ड्राइवर के खिलाफ करीब 56 हजार रुपये के चालान हुए थे, जिनमें से कुछ का भुगतान नहीं किया गया था. वहीं मई और जून में हुए तीन चालानों का भुगतान किया जा चुका था.

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर डिजिटल ट्रैफिक सिस्टम में किसी वाहन के पुराने चालानों और नियमों के उल्लंघन की जानकारी उपलब्ध रहती है, तो बार-बार नियम तोड़ने वाली इस बस पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

क्या रात में इस रूट पर चलने वाली बसों की नियमित चेकिंग होती है? क्या बस के अंदर लगे पर्दों की जांच की गई थी? और इतने चालान होने के बावजूद बस लगातार सड़कों पर कैसे चलती रही?

ड्राइवर और कंडक्टर गिरफ्तार, बस जब्त

पुलिस के मुताबिक, बस में तकनीकी खराबी आने के बाद उसे ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित एक वर्कशॉप में ले जाया गया था. इसके बाद बस को पेंटिंग के लिए कश्मीरी गेट ले जाया जा रहा था.

कश्मीरी गेट पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज होने के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने ड्राइवर कुलदीप (39) और कंडक्टर संदीप (26) को तिमारपुर इलाके की एक पार्किंग से गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने बस को जब्त कर लिया है और उसकी फोरेंसिक जांच की जा रही है. जांच के दौरान बस के अंदर से नाबालिग के बाल भी मिलने की जानकारी सामने आई है.

यह मामला अब सिर्फ एक जघन्य अपराध की जांच तक सीमित नहीं रह गया है. इसने दिल्ली-नोएडा रूट पर रात के समय बसों की निगरानी, पुलिस चेकिंग, CCTV व्यवस्था, ट्रैफिक नियमों के पालन और महिला सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों के क्रियान्वयन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.