मॉर्निंग कोर्ट शुरू होने या न होने पर निर्णय लेने का काम सेक्रेटरी और प्रेसिडेंट का था: प्रवीण कुमार
मुजफ्फरपुर, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। मुजफ्फरपुर में इस बार अभी तक मॉर्निंग कोर्ट शुरू नहीं होने को लेकर मुजफ्फरपुर बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव प्रवीण कुमार ने सामाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि हाईकोर्ट के दिशा निर्देश के अनुसार अप्रैल के प्रथम सप्ताह के प्रथम सोमवार से ही मॉर्निंग कोर्ट शुरू होता था और जून महीने के आखिरी सोमवार को मॉर्निंग कोर्ट खत्म हो जाती थी।
प्रवीण कुमार ने बताया कि पिछले एक-दो वर्षों से हाई कोर्ट ने इस पर फैसला लेने का पावर जिला जज, बार के सेक्रेटरी और प्रेसिडेंट के ऊपर छोड़ दिया है। इस वजह से परेशानी शुरू हो गई है कि मॉर्निंग होगा या डे होगा। जिला जज ने बार एसोसिएशन से पूछा कि मॉर्निंग किया जाए या डे। बार एसोसिएशन ने खुद से कोई निर्णय नहीं लिया और ये पब्लिक में ओपिनियन लेने के लिए बाध्य हो गए।
बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव ने कहा कि पब्लिक का ओपिनियन आया कि माॉर्निंग नहीं डे होना चाहिए। अब मजबूरी में डे में कोर्ट चलेगी। उन्होंने कहा कि मेरे ख्याल यह सही नहीं है, क्योंकि जो पहले से परंपरा चली आ रही थी, उसको जारी रखना चाहिए था।
प्रवीण कुमार ने कहा कि अगर कोई विधेयक विधानसभा में लाया जाए तो उसको पास करने की जिम्मेदारी विधानसभा के मेंबर्स की होती है, लेकिन मुख्यमंत्री कहें कि उसी विधेयक को पब्लिक के बीच में ले जाकर पूछेंगे कि इस विधेयक को पारित करें या फिर न करें तो संभव नहीं है। ऐसे ही लोकसभा में प्रधानमंत्री किसी विधेयक को लेकर कहें कि इसको पारित करने के लिए पब्लिक के बीच जा रहे हैं तो कोई कानून बन ही नहीं सकता।
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार बार में मॉर्निंग हो या न हो इस पर निर्णय लेने का काम सेक्रेटरी और प्रेसिडेंट का था। ये जो ओपिनियन सी करने की बात है, ये अपनी राजनीति को चमकाए रखने और पोजिशन बनाए रखने की नियति है, जिसकी वजह से हमारा बार यह निर्णय नहीं ले पा रहा है।
--आईएएनएस
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