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2 हजार से ज्यादा नागरिकों ने CJI सूर्यकांत को लिखा पत्र, वीडियो में जाने SIR पर रोक की मांग; ECINet के स्वतंत्र ऑडिट की अपील

 

देशभर के 2 हजार से ज्यादा नागरिकों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों को एक खुला पत्र भेजकर मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और इसकी वैधता तथा प्रक्रिया की स्वतंत्र न्यायिक समीक्षा होने तक इसे स्थगित रखने की अपील की गई है। जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर 2025 से भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं।

खुले पत्र में हस्ताक्षरकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े कुछ आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि SIR की प्रक्रिया और इससे जुड़े नए तथ्यों की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही मतदाता पंजीकरण सॉफ्टवेयर और फॉर्म में कथित तौर पर किए गए अनधिकृत बदलावों की कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग भी रखी गई है।

पत्र में ECINet नाम के निर्वाचन संबंधी डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यापक सिक्योरिटी और लीगल ऑडिट कराने की अपील की गई है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने यह भी कहा है कि यह जांच की जानी चाहिए कि इस प्लेटफॉर्म तक किन लोगों की पहुंच थी और क्या वैधानिक अधिकारियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को इसमें बदलाव करने की अनुमति मिली थी। ये सभी बातें पत्र में लगाए गए आरोप और मांगें हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

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खुले पत्र में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी उचित कानूनी और प्रक्रियात्मक कार्रवाई की मांग की गई है। इसके अलावा, तकनीकी गड़बड़ियों, सॉफ्टवेयर लॉक या कथित प्रक्रियात्मक बदलावों के कारण मतदाता सूची से नाम हटने का दावा करने वाले लोगों के नाम बहाल करने की मांग भी रखी गई है।इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल विष्णु भागवत, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, पूर्व आईएएस अधिकारी अदिति मेहता, इतिहासकार आदित्य मुखर्जी, अर्थशास्त्री जयति घोष, पूर्व राज्यसभा सांसद जवाहर सरकार और अभिनेता प्रकाश राज समेत शिक्षाविद, वकील, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व अधिकारी शामिल हैं।

वहीं, निर्वाचन आयोग की ओर से SIR से जुड़े अपने रुख में कहा गया है कि संबंधित आदेशों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई थी। आयोग ने ECINet की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी भी दी है। ऐसे में खुले पत्र में लगाए गए आरोप और आयोग का पक्ष अलग-अलग हैं।अब इस पत्र के जरिए की गई मांगों पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर रहेगी। फिलहाल पत्र भेजने वाले नागरिकों ने SIR, मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया और ECINet की कार्यप्रणाली को लेकर स्वतंत्र न्यायिक जांच और पारदर्शिता की मांग उठाई है।