दिल्ली में मानसून की तैयारियों की समीक्षा, जलभराव वाले हॉटस्पॉट 194 से घटकर 34, एक्शन मोड में एलजी
नई दिल्ली, 20 जुलाई (आईएएनएस)। राजधानी में मानसून के दौरान जलभराव और शहरी बाढ़ की स्थिति से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए सोमवार को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपराज्यपाल टी.एस. संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संयुक्त रूप से की। बैठक में भारी बारिश से निपटने की तैयारियों, शहरी बाढ़ रोकथाम योजना और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के गठन की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक में मंत्री प्रवेश वर्मा और आशीष सूद, मुख्य सचिव, विशेष पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक), अतिरिक्त मुख्य सचिव (सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण), एमसीडी आयुक्त, डीडीए उपाध्यक्ष, मंडलायुक्त तथा पीडब्ल्यूडी, परिवहन, गृह, अग्निशमन और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री ने माना कि वर्ष 2024 और 2025 की तुलना में इस बार राजधानी में जलभराव की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मौसम विभाग की ओर से अचानक भारी बारिश की संभावना जताई गई है, इसलिए सभी विभागों को पूरी सतर्कता के साथ काम करना होगा ताकि जलभराव की स्थिति न्यूनतम रहे या बिल्कुल न बने।
उपराज्यपाल टी.एस. संधू ने स्पष्ट कहा कि जलभराव और शहरी बाढ़ जैसी समस्याओं को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कहीं भी तैयारी में कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने दीर्घकालिक समाधान के लिए ड्रेनेज मास्टर प्लान को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी जोर दिया।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में जलभराव वाले स्थानों की संख्या वर्ष 2024 में 194 थी, जो 2025 में घटकर 169 रह गई। वहीं, 2026 में अब तक यह संख्या उल्लेखनीय रूप से घटकर केवल 34 रह गई है। अधिकारियों ने बताया कि 2025 से 2026 के बीच केवल आठ स्थान ऐसे रहे, जहां जलभराव की समस्या बनी रही।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि एमसीडी, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, एनडीएमसी और डीडीए ने नालों की डी-सिल्टिंग का लक्ष्य पूरी तरह हासिल कर लिया है। पीडब्ल्यूडी ने लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया है, जबकि दिल्ली जल बोर्ड ने ट्रंक सीवर लाइनों का 85.5 प्रतिशत, पेरिफेरल सीवर लाइनों का 91.1 प्रतिशत और ब्रांच सीवर लाइनों का 90.16 प्रतिशत डी-सिल्टिंग कार्य पूरा किया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने निर्देश दिए कि निकाली गई गाद को तुरंत हटाया जाए और कोई भी नाला, सीवर लाइन या मैनहोल खुला न छोड़ा जाए। ऐसी लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं के प्रति सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति रहेगी। बैठक में तूफान के दौरान गिरने वाले खतरनाक पेड़ों की पहले से पहचान कर उन्हें हटाने पर भी जोर दिया गया।
बैठक के अंत में उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को मोबाइल हैवी-ड्यूटी पंप हर समय तैयार रखने, जलभराव की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करने, जमीनी स्तर पर लगातार निगरानी रखने और पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। साथ ही राजधानी में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) को शीघ्र पूरी क्षमता के साथ सक्रिय करने पर भी बल दिया गया।
--आईएएनएस
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