×

मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी, 64% कम हुई बारिश; वीडियो में जाने 16 राज्यों में बढ़ा इंतजार

 

देशभर में गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए मानसून की रफ्तार धीमी पड़ना चिंता का विषय बन गया है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति फिलहाल थम सी गई है, जिसके कारण देश के कई हिस्सों में बारिश का इंतजार लंबा होता जा रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 4 जून से 15 जून के बीच देश में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है।15 जून को जारी सैटेलाइट तस्वीरों में देश के बड़े हिस्से से मानसूनी बादल लगभग गायब दिखाई दिए। यह संकेत है कि मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ गई हैं और आगे बढ़ने की प्रक्रिया फिलहाल धीमी हो गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, इस अवधि में देश में सामान्य रूप से 53.7 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 19.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इस तरह बारिश में करीब 64 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/3gZNwB_fUfI?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/3gZNwB_fUfI/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

मानसून की धीमी गति का असर देश के 16 राज्यों पर दिखाई दे रहा है, जहां लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं। इनमें राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे बड़े राज्य शामिल हैं। इन क्षेत्रों में तापमान अभी भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है और बारिश नहीं होने से गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है।मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून दक्षिण भारत में अच्छी प्रगति करने के बाद महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आसपास ठहर गया है। वहीं पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों को कवर करने के बाद इसकी आगे बढ़ने की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है। मानसून वर्तमान में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों तक पहुंचकर लगभग स्थिर स्थिति में बना हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की प्रगति कई वायुमंडलीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में पर्याप्त सिस्टम विकसित नहीं होने तथा हवा के पैटर्न में बदलाव के कारण इसकी गति प्रभावित हो सकती है। हालांकि मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों में परिस्थितियां अनुकूल होने पर मानसून फिर से सक्रिय हो सकता है और उत्तर तथा मध्य भारत के क्षेत्रों में आगे बढ़ सकता है।

मानसून की धीमी प्रगति का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। जून का महीना खरीफ फसलों की बुआई के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में किसानों की नजरें अब मानसून की अगली गतिविधियों पर टिकी हैं। यदि बारिश में देरी लंबी होती है तो बुआई प्रभावित हो सकती है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी स्थिति चिंताजनक नहीं है और अगले कुछ दिनों में सुधार की संभावना बनी हुई है। फिलहाल देश के कई राज्यों में लोग तपती गर्मी और उमस के बीच मानसून की सक्रियता बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और समय-समय पर अपडेट जारी कर रहा है।