मानसून की रफ्तार धीमी: आधा सीजन बीतने के बाद भी राज्य में बारिश का संकट, सामान्य से 11% कम बरसात दर्ज
मानसून का आधा सीजन यानी जून और जुलाई का महीना खत्म हो चुका है, लेकिन प्रदेश में बारिश की स्थिति अब भी चिंता बढ़ाने वाली बनी हुई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई तक राज्य में सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। शुरुआती उम्मीदों के बावजूद मानसून की कमजोर चाल के कारण कई इलाकों में अब भी पर्याप्त बारिश का इंतजार बना हुआ है।
जून-जुलाई को मानसून का सबसे महत्वपूर्ण दौर माना जाता है, क्योंकि इस दौरान होने वाली बारिश से खेती, जलाशयों और भूजल स्तर पर बड़ा असर पड़ता है। लेकिन इस बार मानसून की सक्रियता कई बार कमजोर पड़ने से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का आंकड़ा सामान्य तक नहीं पहुंच पाया है।
कई जिलों में कम बारिश से बढ़ी चिंता
कम बारिश का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों पर देखने को मिल रहा है। खरीफ फसलों की बुवाई के बाद पर्याप्त बारिश नहीं होने से फसलों की बढ़वार प्रभावित होने की आशंका है। किसान अब अगस्त महीने में अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि फसलों को जरूरी पानी मिल सके।जल स्रोतों पर भी मानसून की धीमी रफ्तार का असर पड़ रहा है। कई बांधों और तालाबों में पानी की आवक उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई है। इससे आने वाले महीनों में जल प्रबंधन को लेकर भी चुनौती बढ़ सकती है।
अगस्त में अच्छी बारिश की उम्मीद
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून अभी खत्म नहीं हुआ है और अगस्त महीने में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। मानसून के दूसरे चरण में यदि अच्छी बारिश होती है तो जून-जुलाई की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।मौसम विभाग लगातार बारिश की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। विभाग का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले मौसमी सिस्टम मानसून की स्थिति को प्रभावित करते हैं। आने वाले दिनों में बनने वाले सिस्टम से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश होने की संभावना है।
किसानों की नजर अब अगस्त की बारिश पर
मानसून की कमजोर शुरुआत के बाद अब किसानों और आम लोगों की उम्मीदें अगस्त की बारिश पर टिकी हैं। अगर अगले कुछ हफ्तों में अच्छी बारिश होती है तो फसलों और जल संसाधनों को राहत मिल सकती है। वहीं, लगातार कम बारिश की स्थिति बनी रहने पर कृषि क्षेत्र पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।फिलहाल प्रदेश में मानसून का आधा सफर पूरा हो चुका है, लेकिन बारिश की कमी ने चिंता जरूर बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें अगस्त में होने वाली बारिश पर टिकी हुई हैं।