☰
×

मानसून सत्र खत्म हुए 54 दिन, फिर भी नहीं हुआ सत्रावसान; वीडियो में जाने 1989 का रिकॉर्ड टूटा

 

संसद के मानसून सत्र की बैठकें खत्म हुए करीब दो महीने होने वाले हैं, लेकिन सत्र अब तक औपचारिक रूप से समाप्त नहीं हुआ है। लोकसभा और राज्यसभा को 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। इसके बावजूद मंगलवार तक दोनों सदनों के सत्रावसान की अधिसूचना जारी नहीं हुई है। इस तरह लोकसभा और राज्यसभा के एक साथ बिना सत्रावसान रहने की अवधि 54 दिन हो गई है। यह दोनों सदनों के लिए ऐसी स्थि में रहने की अब तक की सबसे लंबी अवधि बताई जा रही है।

1989 में 53 दिन तक रही थी ऐसी स्थिति

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/eArAbSpdpX4?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/eArAbSpdpX4/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

इससे पहले वर्ष 1989 में लोकसभा और राज्यसभा 53 दिन तक बिना सत्रावसान के रही थीं। उस समय दोनों सदनों को 18 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया था। इसके बाद सत्रावसान किए बिना ही 11 अक्टूबर को उसी सत्र की बैठक दोबारा शुरू कर दी गई थी।इस बार 54 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक न तो संसद की बैठक दोबारा बुलाई गई है और न ही मानसून सत्र का सत्रावसान किया गया है। इसके साथ ही 1989 में बनी स्थिति का रिकॉर्ड भी पीछे छूट गया है।

सत्रावसान नहीं होने का क्या मतलब?

संसद का सत्रावसान नहीं होने से सरकार के पास जरूरत पड़ने पर इसी सत्र की बैठक दोबारा बुलाने का विकल्प खुला रहता है। अगर सत्रावसान कर दिया जाता है तो नया सत्र बुलाने की प्रक्रिया अपनानी पड़ती है।इसी वजह से मानसून सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त नहीं किए जाने को लेकर राजनीतिक और संसदीय हलकों में चर्चा तेज है।

क्या फिर बुलाई जा सकती है संसद की बैठक?

सत्तारूढ़ खेमे से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में संसद की बैठक दोबारा बुलाए जाने की संभावनाओं को लेकर चर्चा चल रही है। हालांकि, अभी तक बैठक बुलाने को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।यदि सरकार इसी सत्र की बैठक दोबारा बुलाने का फैसला करती है तो लोकसभा और राज्यसभा में मानसून सत्र की कार्यवाही आगे बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल दोनों सदन 13 अगस्त के स्थगन के बाद से बिना सत्रावसान के हैं।इस पूरे घटनाक्रम पर अब सबकी नजर है कि सरकार मानसून सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त करती है या फिर इसी सत्र की बैठक दोबारा बुलाने का विकल्प इस्तेमाल करती है।