देश में मानसून की एंट्री में देरी, वीडियो में जाने केरल तट से 35 किमी दूर 5 दिन से रुका, IMD ने बताया कारण
देशभर में भीषण गर्मी के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून के इंतजार को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है और इसकी देश में एंट्री तय समय से देर से होने की संभावना है। मौसम विभाग ने बताया कि श्रीलंका के ऊपर बने कम दबाव वाले क्षेत्र और तूफानी हवाओं के प्रभाव के कारण मानसून पिछले पांच दिनों से केरल तट के करीब ही ठहरा हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक मानसून वर्तमान में केरल तट से लगभग 30 से 35 किलोमीटर दूर स्थित है, लेकिन अनुकूल परिस्थितियां नहीं बनने के कारण यह आगे नहीं बढ़ पा रहा है। अगले दो से तीन दिनों तक भी इसके आगे बढ़ने की संभावना कम दिखाई दे रही है।
पहले 26 मई तक पहुंचने का था अनुमान
मौसम विभाग ने इससे पहले अनुमान जताया था कि इस वर्ष मानसून 26 मई तक केरल पहुंच सकता है। यदि ऐसा होता तो यह सामान्य तिथि से पहले दस्तक देता। हालांकि मौसम में आए अचानक बदलाव और समुद्री परिस्थितियों के कारण यह अनुमान सही साबित नहीं हो सका।अब ताजा पूर्वानुमान के अनुसार मानसून केरल तट पर करीब एक सप्ताह बाद पहुंच सकता है। यानी पहले जारी किए गए अनुमान की तुलना में मानसून की एंट्री लगभग 10 दिन तक विलंबित हो सकती है।
1 जून मानी जाती है सामान्य तिथि
दक्षिण-पश्चिम मानसून के केरल तट पर पहुंचने की सामान्य तिथि 1 जून मानी जाती है। इसी के साथ देश में चार महीने तक चलने वाले वर्षा ऋतु के मौसम की औपचारिक शुरुआत होती है। मानसून सबसे पहले केरल में प्रवेश करता है और इसके बाद धीरे-धीरे पूरे देश में फैलता है।हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि मानसून की शुरुआत में कुछ दिनों की देरी का मतलब यह नहीं है कि पूरे सीजन में बारिश कम होगी। मानसून की कुल वर्षा और उसकी प्रगति कई अन्य मौसमी कारकों पर भी निर्भर करती है।
गर्मी से राहत का इंतजार बढ़ा
मानसून की देरी का असर देश के कई राज्यों में महसूस किया जा सकता है। उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिमी क्षेत्रों में इस समय भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी है। कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। ऐसे में लोग बारिश और ठंडे मौसम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की गति धीमी रहने से फिलहाल गर्मी से राहत मिलने में कुछ और समय लग सकता है। हालांकि दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियों के चलते हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है।
किसानों की बढ़ी चिंता
मानसून की देरी से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। खरीफ फसलों की बुआई बड़े पैमाने पर मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। यदि मानसून लंबे समय तक देरी से आता है तो कृषि गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। हालांकि मौसम विभाग ने फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं बताई है और कहा है कि आने वाले दिनों में परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।मौसम विभाग का कहना है कि जैसे ही समुद्र और वायुमंडल की स्थितियां अनुकूल होंगी, मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और देश के विभिन्न हिस्सों में वर्षा गतिविधियां शुरू हो जाएंगी। फिलहाल सभी की नजरें केरल तट पर मानसून की आधिकारिक दस्तक पर टिकी हुई हैं।