मानसून ने पकड़ी रफ्तार: गोवा पहुंचा मॉनसून, केरल में रेड अलर्ट; वीडियो में देंखे अगले 10 दिनों में बिहार-झारखंड तक पहुंचने की संभावना
देशभर में गर्मी से राहत देने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। निर्धारित समय से करीब तीन दिन की देरी से दस्तक देने के बाद मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और केरल, कर्नाटक तथा तमिलनाडु के बड़े हिस्सों को कवर करते हुए गोवा तक पहुंच गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि मुंबई में भी मानसून की एंट्री जल्द हो सकती है।
फिलहाल गोवा की राजधानी पणजी, कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु, तमिलनाडु के सलेम और पंबन समेत कई इलाकों में मानसून की सक्रियता के कारण तेज बारिश दर्ज की जा रही है। लगातार हो रही वर्षा से तापमान में गिरावट आई है और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है।
केरल में रेड अलर्ट, कई इलाकों में एहतियात
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने केरल के कई जिलों में आज रेड अलर्ट जारी किया है। रेड अलर्ट का अर्थ है कि अगले 24 घंटों के दौरान अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
भारी वर्षा की आशंका को देखते हुए वायनाड और कासरगोड जिलों में स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया गया है। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर कई प्रतिबंध भी लागू किए हैं। पर्यटकों को ट्रेकिंग स्थलों पर जाने से मना किया गया है, पहाड़ी क्षेत्रों में रात के समय यात्रा पर रोक लगाई गई है और पत्थर खनन व संबंधित गतिविधियों को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।
पूर्वोत्तर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा मानसून
मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों के भीतर मानसून पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों तक पहुंच सकता है। इसमें Assam, Meghalaya, Mizoram, Tripura, Manipur, Nagaland, Arunachal Pradesh और West Bengal के कुछ हिस्से शामिल हैं।
पूर्वोत्तर राज्यों में मानसून के पहुंचने के बाद वहां व्यापक वर्षा गतिविधियां शुरू होने की संभावना है, जिससे कृषि कार्यों को भी गति मिलेगी।
10 दिनों में बिहार, झारखंड और ओडिशा तक दस्तक
IMD का अनुमान है कि यदि मौजूदा परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो अगले 10 दिनों के भीतर मानसून Bihar, Jharkhand और Odisha तक पहुंच सकता है। इन राज्यों के किसान लंबे समय से मानसून का इंतजार कर रहे हैं और इसकी प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं।
हालांकि मौसम वैज्ञानिकों ने यह भी संकेत दिया है कि आगे चलकर मानसून की गति कुछ समय के लिए धीमी पड़ सकती है। यानी शुरुआती तेजी के बाद इसकी प्रगति में अस्थायी ठहराव देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में कुछ क्षेत्रों में बारिश का वितरण प्रभावित हो सकता है।
कृषि और जल संसाधनों के लिए अहम
मानसून की प्रगति देश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। खरीफ फसलों की बुवाई काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। इसके अलावा जलाशयों, नदियों और भूजल स्तर को बनाए रखने में भी मानसून की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
फिलहाल मौसम विभाग लगातार मानसून की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में इसकी रफ्तार और दिशा देश के कई राज्यों के मौसम और कृषि गतिविधियों को प्रभावित करेगी।