×

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी का एक्शन, दिल्ली-एनसीआर में सात जगहों पर तलाशी और सर्वे ऑपरेशन

 

नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने बुधवार और गुरुवार को दिल्ली-एनसीआर में सात जगहों पर तलाशी और सर्वे ऑपरेशन किए। ईडी की ओर से यह कार्रवाई 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' के तहत चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई।

इसी को लेकर ईडी ने गुरुवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी कि यह जांच ताशी लैंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, केएनएस इन्फ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड, सोनी इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड, काशी नाथ शुक्ला (मौजूदा रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल - आरपी) और उनसे जुड़ी अन्य कंपनियों/व्यक्तियों से संबंधित थी।

ईडी ने यह जांच दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज कई एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर शुरू की थी। ये मामले गुरुग्राम के सेक्टर-111 में 'ताशी कैपिटल गेटवे प्रोजेक्ट' और गुरुग्राम के सेक्टर-68 में 'ओरियन गैलेक्सी प्रोजेक्ट' (जिसे पहले 'स्पायर साउथ' के नाम से जाना जाता था) में घर खरीदारों/निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़े थे। इसके अलावा, स्वामिह इन्वेस्टमेंट फंड की कथित धोखाधड़ी से खरीद/डायवर्जन, हाउसिंग लोन धोखाधड़ी और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के आरोप भी शामिल थे।

जांच से पता चला है कि ताशी ग्रुप ने 600 से ज्यादा घर खरीदारों से लगभग 386 करोड़ रुपए जमा किए थे, लेकिन लगभग 10 से 15 वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक कब्जा नहीं दिया है। जांच में यह भी पता चला कि ग्रुप ने निवेशकों के फंड से लगभग 120 करोड़ रुपए का गबन किया, जिसमें स्वामिह फंड का 98 करोड़ रुपए का निवेश भी शामिल है।

आगे की जांच से पता चला कि घर खरीदारों से जमा की गई और फाइनेंशियल/इन्वेस्टमेंट सुविधाओं के जरिए मिली बड़ी रकम को आपस में जुड़ी ग्रुप कंपनियों और प्रमोटर के कंट्रोल वाली संस्थाओं के बीच ट्रांसफर किया था। ईडी की ओर से मनी ट्रेल, कंपनियों के बीच लेन-देन, प्रोजेक्ट के हिसाब से फंड का इस्तेमाल और एक प्रोजेक्ट से दूसरे प्रोजेक्ट में फंड के संभावित डायवर्जन की जांच की जा रही है, ताकि 'अपराध से हुई कमाई' और गलत तरीके से कमाए गए पैसे से खरीदी गई संपत्ति की कुल मात्रा का पता लगाया जा सके।

ईडी की ओर से की गई आगे की जांच से यह भी पता चला है कि मुख्य प्रमोटर काशी नाथ शुक्ला के परिवार के सदस्य कथित तौर पर विदेश में बस गए हैं और उन्होंने पिछले 5 से 10 वर्षों में भारत में मौजूद अपनी बड़ी संपत्ति बेच दी है या उसका निपटान कर दिया है।

जांच में यह भी पता चला है कि उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर विदेशी कंपनियों/संस्थाओं में काफी निवेश किया गया है, जिसमें यूके में एक ओल्ड एज केयर होम चलाना भी शामिल है। इसके अलावा, जांच में यह भी पता चला है कि उनके परिवार के एक सदस्य ने निवेश के जरिए सेंट किट्स की नागरिकता के लिए आवेदन किया था।

तलाशी अभियान के दौरान जांच के दायरे में आने वाली कंपनियों और प्रोजेक्ट्स से जुड़े कई अहम दस्तावेज, विदेशी निवेश से संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की पहचान की गई और उन्हें आगे की जांच के लिए जब्त किया गया। इसके साथ ही 22 लाख रुपए के बकाया बैलेंस वाले बैंक अकाउंट/फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें (एफडीआर) और एक लग्जरी कार को फ्रीज/जब्त किया गया। वहीं, ईडी की ओर से इस मामले से संबंधित आगे की जांच जारी है।

--आईएएनएस

डीके/डीकेपी