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मोहन भागवत का बड़ा बयान, बोले- भारत में भी बांग्लादेश और फ्रांस जैसे हालात बनाने की कोशिश

 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी उत्सव के दौरान भारत की आंतरिक और वैश्विक चुनौतियों को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसी शक्तियां मौजूद हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं। उनके मुताबिक, इन शक्तियों का उद्देश्य केवल सत्ता परिवर्तन करके हालात सुधारना नहीं, बल्कि अपने समर्थकों को सत्ता में बैठाना है। भागवत ने यह भी दावा किया कि भारत में बांग्लादेश और फ्रांस जैसे हालात बनाने की कोशिशें हो रही हैं।

मोहन भागवत मंगलवार को नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में आयोजित विजयादशमी उत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में उन्होंने शस्त्र पूजन किया और देश, समाज, आंदोलनों तथा राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग भारत और हिंदू समाज को बांटना चाहते हैं और उन्हें कुछ नेताओं का समर्थन भी मिलता है।

आंदोलन का उद्देश्य समाधान होना चाहिए, विभाजन नहीं

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने आंदोलनों की भूमिका पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि समाज में समस्याएं होने पर आंदोलन होना स्वाभाविक है, लेकिन उनका मकसद उन समस्याओं का समाधान निकालना होना चाहिए। आंदोलन के जरिए समाज में द्वेष, आपसी वैमनस्य और विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए।

भागवत के मुताबिक, कई बार आंदोलनों का इस्तेमाल उनके मूल उद्देश्य से हटकर दूसरे हितों को साधने के लिए किया जाता है। ऐसी स्थिति में आंदोलन राजनीति का साधन बन जाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी आंदोलन के उद्देश्य और उसके परिणामों को समझें तथा समाज में आपसी सद्भाव बनाए रखने पर ध्यान दें।

समाज की सक्रियता से होगा समस्याओं का समाधान

RSS प्रमुख ने कहा कि देश और समाज को चलाने की जिम्मेदारी केवल नेताओं की नहीं है। समाज की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है। उनके अनुसार, जब लोग सामूहिक रूप से जिम्मेदारी निभाते हैं और समस्याओं के समाधान के लिए आगे आते हैं, तभी समाज में सकारात्मक बदलाव संभव होता है।

उन्होंने भारत की बढ़ती ताकत और नई पीढ़ी में देश के प्रति गर्व की भावना का भी उल्लेख किया। भागवत ने दावा किया कि भारत की प्रगति कुछ वैश्विक शक्तियों के हितों के विपरीत है और इसी वजह से देश को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं। ये उनके संबोधन में व्यक्त किए गए विचार और आरोप हैं।

1925 में हुई थी RSS की स्थापना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हर साल विजयादशमी के अवसर पर अपना स्थापना दिवस मनाता है। संघ की स्थापना वर्ष 1925 में हुई थी। इस साल 20 अक्टूबर को नागपुर में आयोजित विजयादशमी उत्सव संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक गतिविधियों के साथ हुई। मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया और इसके बाद स्वयंसेवकों को संबोधित किया। उनके भाषण में देश की एकता, सामाजिक सद्भाव, राजनीतिक आंदोलनों और भारत को प्रभावित करने वाली वैश्विक परिस्थितियों जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

भागवत के संबोधन का मुख्य संदेश यह रहा कि देश की समस्याओं का समाधान केवल सत्ता परिवर्तन से नहीं, बल्कि समाज की सक्रियता, आपसी सहयोग और रचनात्मक प्रयासों से होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि आंदोलनों को राजनीतिक स्वार्थों का माध्यम बनाने से सामाजिक एकता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, भारत को कमजोर करने की कोशिशों और विदेशी शक्तियों की भूमिका को लेकर उनके दावे उनके अपने आकलन हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए अलग से प्रमाण आवश्यक होंगे।