×

मोहन भागवत के बयान पर विपक्ष ने उठाए सवाल; सिब्बल बोले-भारत में विविधता की रक्षा पर कभी नहीं उठाई आवाज

 

नई दिल्ली, 30 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा न्यूयॉर्क में आयोजित कार्यक्रम में हिंदू-मुस्लिम से जुड़े दिए गए बयान पर कांग्रेस और आरजेडी के नेताओं ने प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाए।

मोहन भागवत ने 'एक दुनिया, एक मानवता कार्यक्रम में कहा था कि भारत की पहचान 'विविधता में एकता' से है और अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता।

मोहन भागवत के इस बयान पर राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आईएएनएस से कहा, "हम इस बात का समर्थन करते हैं कि हम सभी राम भक्त हैं। लेकिन जब आप (मोहन भागवत) कहते हैं कि विविधता का जश्न मनाया जाना चाहिए, विविधता को स्वीकार किया जाना चाहिए, विविधता का सम्मान किया जाना चाहिए और विविधता की रक्षा की जानी चाहिए। ये चार बातें आप कहते हैं, जश्न, सम्मान, स्वीकार्यता और सुरक्षा। क्या आपने कभी तब आवाज उठाई है, जब भारत में विविधता की रक्षा नहीं की गई? क्या आपने कभी आवाज उठाई है? नहीं, कभी नहीं। आप ऐसी राजनीति का समर्थन करते हैं जो विविधता के खिलाफ है। आप ऐसी राजनीति का समर्थन करते हैं जो विविधता को स्वीकार नहीं करती, विविधता का सम्मान नहीं करती, विविधता का जश्न नहीं मनाती और विविधता की रक्षा नहीं करती। फिर भी, आप न्यूयॉर्क में ये बातें कहते हैं। क्योंकि आप एक अलग तरह के लोगों से बात कर रहे हैं। इसीलिए आप ऐसी बातें कहते हैं। आप अब दूसरी दुनिया में स्वीकार्यता पाना चाहते हैं।"

आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "भागवत को ये बातें न्यूयॉर्क जाकर पता चली। जब वापस आएं तो इस विचार को इमीग्रेशन डेस्क से निकाल कर नागपुर और झंडेवालान में रखें। इस विचार को दो चम्मच अपने मुख्यमंत्रियों को भी दें। केंद्रीय कैबिनेट में कुछ ऐसे मंत्री भी हैं, जिनके पोर्टफोलियो के बारे में अभी तक पता नहीं है, लेकिन वे सुबह उठते ही यही काम करते हैं। इसलिए, उन्हें सुबह-शाम इस विचार को दो चम्मच दें, तभी इस बयान की प्रासंगिकता है। अन्यथा यह बयान मैडिसन स्क्वायर का ही बयान बनकर रह जाएगा।"

समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, "मोहन भागवत के बयान का कोई मतलब नहीं है। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने संविधान का मसौदा तैयार किया था। संविधान की प्रस्तावना और संविधान में देश के सभी नागरिकों के अधिकारों और सम्मान का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है। कोई भी सरकार हो, उसे संविधान को मानना चाहिए तभी देश, समाज, भाईचारा और अनेकता में एकता का सूत्र मजूबत रहेगा। मोहन भागवत को अपनी सरकारों को ऐसी नसीहत दें।"

कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने कहा, "मैं उनकी (मोहन भागवत) बात से 100 फीसदी सहमत हूं कि ऐसी सोच रखने वाला व्यक्ति हिंदू या धर्मनिरपेक्ष हिंदू नहीं हो सकता। हालांकि, उन्हें यह जवाब देना चाहिए कि उनकी पार्टी में किसी भी मुस्लिम को विधायक या सांसद का टिकट क्यों नहीं मिलता। इसका कोई जवाब नहीं है। केंद्रीय कैबिनेट में मुस्लिम समुदाय का एक भी मंत्री नहीं है, इसका भी कोई जवाब नहीं है। देखिए, यही उनका दोहरा चरित्र है। सार्वजनिक रूप से राम का नाम जपना जबकि पीछे खंजर छिपाए रखना, और राम मंदिर पर चुप रहना। उन्हें इसका जवाब देना चाहिए, वे किसी भी मुस्लिम को टिकट क्यों नहीं देते? जबकि अटल बिहारी वाजपेयी जी ऐसा करते थे।"

कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने कहा, "मोहन भागवत उस तरीके से हैरान थे, जिस तरह आरएसएस सदस्यों ने उनका स्वागत किया। वे अमेरिका में एकता की बात करते हैं, लेकिन जब हमारे देश में हल्द्वानी में मंच पर एक सबसे बड़े और सम्मानित दलित नेता भाषण देते हैं, तो उनकी पार्टी के सदस्य उस मंच को धोने और शुद्ध करने की बात करते हैं। तब मोहन भागवत चुप रहते हैं। जब दलितों का सम्मान नहीं होता तो आप एकता की बात कैसे कर सकते हैं? जब मुसलमानों का सम्मान नहीं होता तो आप एकता की बात कैसे कर सकते हैं?"

--आईएएनएस

ओपी/डीएससी