मोबाइल फोन निर्माण योजना पर मुहर, प्रधानमंत्री ने रोजगार बढ़ने का भरोसा जताया
नई दिल्ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 62,500 करोड़ रुपए के बजटीय परिव्यय के साथ मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) को मंजूरी दी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारत में 'मेक इन इंडिया' और हमारे इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तंत्र को एक बड़ा बढ़ावा!
उन्होंने कहा कि कैबिनेट द्वारा 62,500 करोड़ रुपए के परिव्यय वाली मोबाइल फोन विनिर्माण योजना को मंजूरी देने से उत्पादन बढ़ेगा, घरेलू मूल्यवर्धन में वृद्धि होगी, आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होगा। आने वाले कुछ वर्षों में, इस योजना से युवाओं के लिए रोजगार के कई अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
उत्पादन और घरेलू मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने, आपूर्ति श्रृंखला को लचीला बनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए, सरकार ने मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) शुरू की है।
एमपीएमएस योजना का उद्देश्य प्रौद्योगिकीय संप्रभुता हासिल करने, बड़े आर्थिक मूल्य प्राप्त करने और डिजाइन तथा अनुसंधान एवं विकास में भारतीय पेटेंट बनाने के लिए स्वदेशी ब्रांडों का निर्माण करना है।
इस योजना की अवधि 5 वर्ष अर्थात् वित्तीय वर्ष 2026-27 से वित्तीय वर्ष 2030-31 तक है।
इस योजना के तहत देश में मोबाइल फोन के विनिर्माण के लिए पात्र बिक्री पर 2.25 से 5 प्रतिशत तक की अलग-अलग दरों पर प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। योजना में प्रमुख कंपोनेंट/सब-असेंबली की घरेलू सोर्सिंग से जुड़ा 1.5 प्रतिशत तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन भी शामिल है। भारतीय ब्रांड बनाने के लिए, उत्पाद के डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास के लिए पात्र बिक्री पर 3 प्रतिशत की दर से अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।
इस योजना की अवधि के दौरान, मोबाइल फोन के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ देश में मोबाइल फोन का कुल उत्पादन लगभग 39,00,000 करोड़ रुपए तक पहुंचने की संभावना है। इस योजना से लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने से आर्थिक विकास, रोजगार और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
प्रधानमंत्री के 'मेक इन इंडिया' विजन ने वित्त वर्ष 2014-15 से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को 7 गुना और निर्यात को 11 गुना बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र विशेष रूप से दूरदराज के गांवों के युवा पुरुषों और महिलाओं के लिए, एक प्रमुख रोजगार स्रोत के रूप में उभरा है, जहां कुछ संयंत्र एक ही स्थान पर 5,000 से अधिक कर्मचारियों को रोजगार प्रदान करते हैं।
मोबाइल फोन विनिर्माण और निर्यात के क्षेत्र में वृद्धि का प्रमुख वाहक रहा है और भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकोसिस्टम का आधार बन गया है। भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता है, और देश में प्रयुक्त 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन का विनिर्माण स्वदेशी रूप से किया जा रहा है।
वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत से निर्यात होने वाले सबसे बड़े उत्पाद वर्ग के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने डीजल ईंधन और कट हीरे आदि पारंपरिक प्रमुख निर्यात वस्तुओं को पीछे छोड़ दिया है। मोबाइल फोन अब भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और निर्यात का एक बड़ा हिस्सा हैं और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
व्यापक स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना ने भारत को मोबाइल विनिर्माण और निर्यात के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पीएलआई-एलएसईएम योजना की अवधि 31 मार्च 2026 तक थी।
--आईएएनएस
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