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एमएमआरडीए की 600 टीपीडी ठोस अपशिष्ट परियोजना का 60 प्रतिशत काम पूरा, तीन शहरों को मिलेगा आधुनिक कचरा प्रबंधन तंत्र

 

मुंबई, 16 सितंबर (आईएएनएस)। मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) की बदलापुर में विकसित की जा रही 600 टन प्रतिदिन (टीपीडी) क्षमता वाली एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण परियोजना का 60 प्रतिशत भौतिक कार्य पूरा हो चुका है। इस परियोजना के पूरा होने पर अंबरनाथ, कुलगांव-बदलापुर और उल्हासनगर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की आधुनिक और वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित होगी।

एमएमआरडीए के अनुसार, केएफडब्ल्यू समर्थित मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम (एमएमआरयूआईआईपी) के तहत विकसित की जा रही यह परियोजना तीनों शहरों की कचरा प्रबंधन संबंधी चुनौतियों का दीर्घकालिक समाधान प्रदान करेगी। इससे स्वच्छ, पर्यावरण-अनुकूल और सतत शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा।

परियोजना के तहत प्रतिदिन 600 टन नगर ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जाएगा। इसके लिए बदलापुर में अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की छंटाई और पुनर्प्राप्ति के लिए मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ), जैव-अपघटनीय कचरे के निपटान की विशेष व्यवस्था तथा शेष अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान के लिए वैज्ञानिक सैनिटरी लैंडफिल शामिल है। यह परियोजना डिजाइन-बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (डीबीओटी) मॉडल पर विकसित की जा रही है।

परियोजना के तहत कागज, प्लास्टिक, धातु और कांच जैसी उपयोगी सामग्रियों की पुनर्प्राप्ति और पुनर्चक्रण किया जाएगा। वहीं जैव-अपघटनीय कचरे से कंपोस्ट तथा उपयुक्त अपशिष्ट से रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ) तैयार किया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, इससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम होगा और चक्रीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही लैंडफिल में भेजे जाने वाले कचरे की मात्रा भी काफी घटेगी।

परियोजना के शुरू होने के बाद खुले में कचरा फेंकने और पारंपरिक डंपिंग ग्राउंड पर निर्भरता कम होगी। इससे दुर्गंध, रोग फैलाने वाले कीटों के प्रजनन और आग लगने जैसी समस्याओं पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा, जैविक कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण से मीथेन उत्सर्जन में कमी आएगी। लीचेट के उचित उपचार से मिट्टी और भूजल को प्रदूषण से बचाने में भी सहायता मिलेगी।

एमएमआरडीए के मुताबिक, परियोजना के निर्माण और संचालन के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत कचरा बीनने वालों को औपचारिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली से जोड़कर उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इससे क्षेत्रीय पुनर्चक्रण उद्योग को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एमएमआरडीए विभिन्न शहरी निकायों, केएफडब्ल्यू डेवलपमेंट बैंक, परियोजना प्रबंधन सलाहकारों, ठेकेदारों और तकनीकी एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय कर रहा है।

निर्माण कार्य को गति देने के लिए नियमित समीक्षा बैठकें, वैधानिक मंजूरियां, पूर्व में जमा कचरे को हटाने, नियंत्रित ब्लास्टिंग, सहायक बुनियादी ढांचे के विकास और उपकरणों की स्थापना जैसे कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है।

एमएमआरडीए का कहना है कि 60 प्रतिशत कार्य पूरा होने के साथ परियोजना अब पूर्णता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और अंबरनाथ, कुलगांव-बदलापुर तथा उल्हासनगर के लिए आधुनिक, वैज्ञानिक और टिकाऊ कचरा प्रबंधन व्यवस्था की मजबूत नींव तैयार कर रही है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी