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मीरजापुर में शिक्षक सम्मेलन में सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, बोले-सैफई सिंडिकेट के लोगों का कब्जा था नौकरियों पर

 

मीरजापुर, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर शिक्षा विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी हो या कांग्रेस, ये दोनों शिक्षा विरोधी हैं। ऐसा न होता तो प्रदेश में शिक्षा की ये दुर्गति नहीं होती। शिक्षा में अव्यवस्था होने पर सबसे पहले शिक्षकों का सम्मान प्रभावित होता है। स्नातक युवाओं के सामने भविष्य की चिंता खड़ी होती है, वे हताश और निराश होते हैं, पलायन पर मजबूर होते हैं। समाजवादी पार्टी के समय प्रदेश में यही सब हुआ। विश्वविद्यालय नहीं खोले गए, महाविद्यालयों को मान्यता नहीं दी गई और अराजकता चरम पर थी।

उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रदेश सरकार के प्रयासों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो रहा है, युवाओं को नौकरी मिल रही है, शिक्षकों को सम्मान और सुरक्षा मिल रही है, तथा शिक्षण संस्थानों का कायाकल्प किया जा रहा है।

सीएम योगी ने मीरजापुर में आयोजित शिक्षक सम्मेलन में कहा कि विंध्यवासिनी धाम की पावन धरती श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। शारदीय नवरात्रि में लाखों श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी, मां अष्टभुजी और काली खोह में मां काली के दर्शन, पूजा-अर्चना कर मातृशक्ति के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में मां विंध्यवासिनी धाम में भव्य कॉरिडोर का निर्माण हो चुका है। मां गंगा के पावन घाटों का निर्माण कार्य भी पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। ये सुविधाएं वर्ष 2017 से पहले भी दी जा सकती थीं, लेकिन तब इस धनराशि का दुरुपयोग माफिया को पालने और गरीबों की जमीनों पर कब्जा करने के लिए किया जाता था। हमारी सरकार ने उसी धनराशि का दुरुपयोग रोका और उसे विकास कार्यों में लगाया। इसी का परिणाम है कि प्रतिदिन दो लाख श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी धाम आ रहे हैं। इसके लिए इच्छाशक्ति और वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लेने की सामर्थ्य चाहिए, लेकिन आजादी के बाद सत्ता में आए लोगों के पास कोई स्पष्ट विजन या दिशा नहीं थी।

सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस व सपा में हर काम परिवार के नाम और परिवार तक सीमित रखने की प्रवृत्ति रही। कांग्रेस केवल नेहरू परिवार के लिए और समाजवादी पार्टी सैफई परिवार तक सीमित रही। इन लोगों ने प्रदेश को बेगाना बना दिया था और इसीलिए जनता ने इन्हें बेगाना बना दिया, इनकी छुट्टी कर दी। सपा का वास्तविक चेहरा देखना हो तो राज्यसभा में इसके प्रत्याशियों के चयन को देखिए। ये पीडीए-पीडीए चिल्लाते हैं, लेकिन जब राज्यसभा चुनाव आए तो अपने चचाजान और मुंबई के धन्ना सेठ को प्रत्याशी बना दिया। इन्हें कोई और दलित, वंचित, पिछड़ा या अगड़ा नहीं दिखाई दिया। अगर इन वर्गों पर विश्वास नहीं था तो कम से कम किसी मुस्लिम को ही प्रत्याशी बना देते, लेकिन उसे भी नहीं बनाया। इसके विपरीत भारतीय जनता पार्टी ने आठ टिकट दिए, जिनमें तीन फॉरवर्ड, तीन बैकवर्ड और दो अनुसूचित जाति के प्रत्याशी थे। पार्टी ने सामान्य कार्यकर्ताओं को अवसर दिया, किसी धन्ना सेठ को नहीं, क्योंकि कार्यकर्ता मेहनत करता है और अपना समय देता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में एनडीए ने आठ प्रत्याशी दिए और आठों जीते। सपा ने परिवार और धन्ना सेठ को टिकट दिया, जिसका परिणाम यह हुआ कि पीडीए की हवा निकल गई।

सीएम योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी के समय अनिल यादव नाम के व्यक्ति थे, जो सैफई परिवार के रिश्तेदार थे। वह पद के योग्य नहीं थे, फिर भी उन्हें आयोग का अध्यक्ष बना दिया गया। हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी के साथ उन्हें कुर्सी से हटाया और कहा कि वह उस पद के योग्य नहीं हैं। उस समय युवा सड़कों पर चिल्लाता था, लेकिन लखनऊ में बैठी अखिलेश यादव की सरकार कानों में तेल डालकर खर्राटे लेती थी। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता था। आज प्रदेश का युवा नौकरी प्राप्त कर रहा है और स्टार्टअप इकोसिस्टम के माध्यम से दूसरों को रोजगार भी दे रहा है।

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को चार बार प्रदेश में शासन करने का अवसर मिला, लेकिन उस समय मीरजापुर मंडल के तीन जनपदों- मीरजापुर, सोनभद्र और भदोही में न कोई मेडिकल कॉलेज था और न कोई विश्वविद्यालय। आज मंडल में दो मेडिकल कॉलेज और दो विश्वविद्यालय सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। मीरजापुर में मां विंध्यवासिनी के नाम पर विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज भी शुरू हो गया है। भदोही में काशी नरेश विश्वविद्यालय तथा सोनभद्र में मेडिकल कॉलेज शुरू हो गया है। सपा शासन में मंडल में न सड़क थी, न बिजली, न पानी, न सुरक्षा, न सरकार की सहायता, न शिक्षा और न नौकरी। सैफई सिंडिकेट जिसे चाहता था, उसे नौकरी मिलती थी। नौकरियों पर भी एक ही परिवार का कब्जा था। हमारी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया है।

सीएम योगी ने कहा कि एनडीए और भाजपा के नेतृत्व में प्रदेश में सरकार बनने के बाद साढ़े नौ वर्षों में साढ़े नौ लाख नौजवानों व स्नातकों को सरकारी नौकरी दी गई है। सुरक्षा का बेहतरीन वातावरण बनाया गया, जिससे 65 लाख लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में नौकरियां मिली है। वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना के तहत तीन करोड़ से ज्यादा रोजगार विकसित किए गए। आस्था भी आर्थिकी का कारण बन सकती है। प्रयागराज का महाकुंभ, मां विंध्यवासिनी धाम और काशी विश्वनाथ धाम इसके उदाहरण हैं। अयोध्या में वर्ष 2017 से पहले स्थिति ऐसी थी कि रामलला के दर्शन के लिए संकरे मार्गों से गुजरना पड़ता था और रामलला टाट के नीचे रहने के लिए मजबूर थे। स्वतंत्र भारत हम सबको ललकारता था कि क्या यही स्वाधीनता है कि हमारे प्रभु टाट के नीचे रहें? प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आज भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण हो गया है। विपक्ष इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं। जिन लोगों ने राम मंदिर का विरोध किया और आस्था पर कुठाराघात किया, वे आज अयोध्या के बारे में उपदेश देते फिर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की अनेक योजनाएं युवाओं के लिए चल रही हैं। दो करोड़ युवाओं को टैबलेट देने की योजना है, जिनमें 62 लाख युवाओं को टैबलेट दिए जा चुके हैं। चुनाव संपन्न होने के बाद फिर बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित होंगे और स्नातक युवाओं को टैबलेट उपलब्ध कराकर डिजिटल अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग सेंटर प्रारंभ किए गए हैं। ये केंद्र निशुल्क हैं और युवा भौतिक तथा वर्चुअल दोनों माध्यमों से इनका लाभ ले सकते हैं। नीट, आईआईटी-जेईई, यूपीएससी, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सरकार युवाओं के साथ खड़ी है। सरकार युवाओं की प्रतिभा और सामर्थ्य पर विश्वास करती है और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध करा रही है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले शिक्षकों को न सम्मान था, न सुरक्षा और न स्वास्थ्य की सुविधा। अब सरकार ने बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के स्ववित्तपोषित संस्थानों सहित 15 लाख शिक्षकों को उनके परिवार सहित प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया है। शिक्षकों को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी भी दी गई है। किसी घटना या दुर्घटना की स्थिति में 40 लाख रुपये से लेकर डेढ़ करोड़ रुपये तक की सामाजिक सुरक्षा की सुविधा उपलब्ध होगी। सरकार शिक्षकों को सम्मान, सुरक्षा और सुविधाएं देती है तथा शिक्षण संस्थानों को कायाकल्प से जोड़ती है। ये काम वर्ष 2017 से पहले भी हो सकते थे, लेकिन उस समय न दृष्टि थी और न विजन। जब विजन ही नहीं होगा तो मिशन कैसे पूरा होगा।

--आईएएनएस

एसके/